ईश्वर को प्राप्त करना संभव है – पौराणिक हिंदी कथा

भारत में पौराणिक हिंदी कथा पढने की उत्सुकता आज भी बहुत ज्यादा है. ऐसी कथाएं ना सिर्फ रोचक होती है बल्कि हमें कुछ ना कुछ शिक्षा भी देकर जाती है. ऐसी ही एक पौराणिक हिंदी कहानी हम आपके लिए लेकर आये है.

एक धर्म गुरु थे। उनके प्रवचन से  प्रभावित होकर एक युवक ने उनको अपना गुरु बना लिया। युवक रोज गुरुजी के आश्रम आता, उनकी सेवा करता। गुरुजी जहाँ भी कहीँ प्रवचन करने जाते युवक को भी साथ ही ले जाते। इस प्रकार वह युवक लगभग हर सत्संग और प्रवचन में गुरुजी के साथ रहता।

गुरुजी को युवक के हाव भाव देखकर कुछ दिन से लग रहा था कि उसका मन कहीं भटक रहा है । एक दिन गुरु जी ने युवक को अपने पास बुला कर पूछा, ‘क्या बात है  पिछले कुछ दिनों से तुम परेशान लग रहे?’ युवक ने उत्तर दिया, ‘गुरुजी मैं पूरे श्रद्धा भाव से आपकी सेवा सत्कार कर रहा हूं, आपकी प्रवचन में बताई गई बातें भी पूरे ध्यान से सुनता हूँ लेकिन मैं आपका शिष्य इसलिए बना था क्योंकि मैं यह जानना चाहता था कि क्या ईश्वर को प्राप्त करना संभव है? परन्तु इतने दिनों तक आपकी संगत में रहने पर भी मुझे इस प्रश्न का उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। अतः मेरा मन थोड़ा अशांत है।

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‘शिष्य की बात सुनकर गुरुजी मुस्कुराने लगे। उन्होंने कहा कि पुत्र इतनी भी क्या जल्दी है कुछ दिन और ईश्वर के चरणों में बिताओ फिर मैं तुम्हें ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताऊंगा।  कुछ दिन और बीते तो फिर से शिष्य को गुरुजी ने अपने समक्ष पाया। गुरु जी ने पूछा तुम सचमुच ईश्वर का साक्षात्कार करना चाहते हो? युवक ने उत्साहित होकर कहा, जी गुरुजी। गुरुजी ने कहा ठीक है आज मैं तुम्हें ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बतलाता हूँ, चलो मेरे साथ।

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गुरुजी अपने शिष्य को लेकर नदी की ओर चल पड़े। नदी के किनारे पहुंचने पर गुरुजी ने अपने शिष्य को गर्दन से पकड़कर उसका मुँह नदी में डूबा दिया। गुरुजी के यूँ अचानक डुबोने से शिष्य संभल नहीं पाया और पानी से बाहर आने को छटपटाने लगा। कुछ देर युवक को यूँ ही डूबाये रखने के बाद गुरुजी ने युवक को छोड़ दिया। युवक ने लम्बी साँस ली फिर गुरुजी की ओर देखकर कहा आप यह क्या कर रहे थे! गुरुजी ने मुस्कुरा कर पूछा, जब तुम पानी में थे तो क्या सोच रहे थे, तुम्हारे मन को उस समय किसकी आस थी। युवक ने कहा उस समय तो बस एक कतरा साँस लेने के लिए ही मैं मरा जा रहा था लग रहा था बस एक पल के लिए हवा में मैं साँस ले पाऊँ।

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जब आत्मा को इतनी ही तड़प होती है ईश्वर से मिलने की,  जितनी तुम्हें डूबते समय हवा की थी, तब आत्मा को परमात्मा के दिव्य दर्शन होते हैं। ईश्वर से मिलने के लिए पहले अपनी आत्मा में वो भूख, वो तड़प पैदा करो तभी ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है।

तो दोस्तों ये थी एक पौराणिक हिंदी कथा जो हमें ये सीख देती है कि अगर ईश्वर को प्राप्त करना है तो अपनी आत्मा में उसे पाने की भूख होना बहुत ज़रूरी है.

Vineet

नमस्ते। मुझे नयी कहानियां लिखना और सुनना अच्छा लगता है. मैं भीड़-भाड़ से दूर एक शांत शहर धर्मशाला (H.P) में रहता हूँ जहाँ मुझे हर रोज़ नयी कहानियां देखने को मिलती है. बस उन्ही कहानियों को मैं आपके समक्ष रख देता हूँ. आप भी इस वेबसाइट से जुड़ कर अपनी कहानी पब्लिश कर सकते है. Like us on Facebook.

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1 Response

  1. Vijay malviya says:

    Good

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