भविष्य से ज्यादा अपने आज की सोचे – Short Story in Hindi

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान को अपने कल चिंता जरूर रहती है। लेकिन अपने इस कल की चिंता में वो ये भूल जाता है कि जो उसके पास आज है वो शायद कल ना हो। इसीलिए हमेशा यही कहा गया है कि कल कि चिंता ऊपर वाले के हाथों में छोड़ दो। आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहे है जो एक सेठ के ऊपर आधारित थी जिसने अपने जीवन मे सब कुछ हासिल किया लेकिन सेठ सिर्फ एक चीज से हमेशा दूर रहे और वो थी ‘शांती’।

ये सेठ अपने गांव का सबसे धनवान व्यक्ति हुआ करता था। दिन भर खूब मेहनत से काम करता लेकिन एक दिन ऐसा आया जब उसने अपने मुनीम को बुलाकार अपनी आज तक की कमाई का हिसाब मांगा। कुछ दिन बाद वो मुनिम सेठ जी की सारी कमाई का हिसाब लेकर आया और बोला कि ‘जिस तरह हिसाब से आज खर्चा हो रहा है उस तरह अगर आज से कोई कमाई न भी हो आपकी सात पीढ़ियां आराम से अपना जीवन जी सकती है’। ऐसा सुन कर हर इंसान को एक अलग ही खुशी महसूस होती है लेकिन दूसरी तरफ सेठ जी ये सुनकर चिंता में पढ़ गए। ऐसा सुन कर उन्हें अपनी आठवी पीढ़ी की चिंता सताने लगी।

 

देखते ही देखते सेठ जी चिंता की वजह से बीमार भी रहने लगे। उनका स्वस्थ्य हर दिन बिगड़ता ही जा रहा था। और ये सब अगर हो रहा था तो उसकी वजह थी आठवी पीढ़ी की चिंता। तभी एक दिन सेठ जी के पास उनका एक दोस्त मिलने आया। सेठ जी की हालत देख उसने उन्हें एक उपाय बताया और एक एक पंडित को खाना खिलाने के लिए बोला। सेठ जी तुरंत घर के पास रह रहे एक पंडित के घर खाना लेकर गए।

 

तभी पंडित ने अपनी पत्नी को आवाज लगाई और बोलें की सेठ जी हमारे लिए खाना लेकर आंए है। सेठ जी को खुशी हुई की अब उनका रोग ठीक हो जाएगा। लेकिन तभी अंदर से पत्नी की आवाज आई कि खाना पहले ही कोई देकर जा चुका है। पंडित जी का एक नियम था कि जो पहले खाना देकर जाता वो उसका ही खाते थे। इसके बाद सेठ जी ने कल आने के लिए पूछा तो पंडित जी ने तुरंत जवाब दिया कि मैं कल की चिंता नहीं करता। भगवान के हाथ में छोड़ देता हूं। ये सुनकर सेठ जी हैरान हो गए और फिर उन्हें समझ में आया कि कल की चिंता करने से खुद का ही नुकसान है।

 

इसके बाद सेठ जी खुशी खुशी रहने लगे और अपने आज का आनंद लेने लगे। इससे ये साफ हो जाता है कि हम कितना भी भाग लें, कुछ ना कुछ जरूर छूटेगा ही। इसलिए कल की चिंता ना करें और अपने आज का आनंद लें।

Vineet

नमस्ते। मुझे नयी कहानियां लिखना और सुनना अच्छा लगता है. मैं भीड़-भाड़ से दूर एक शांत शहर धर्मशाला (H.P) में रहता हूँ जहाँ मुझे हर रोज़ नयी कहानियां देखने को मिलती है. बस उन्ही कहानियों को मैं आपके समक्ष रख देता हूँ. आप भी इस वेबसाइट से जुड़ कर अपनी कहानी पब्लिश कर सकते है. Like us on Facebook.

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