हनुमान जी की कहानी – जानिये क्यों होती है हनुमान जी की मूरत केसरी रंग की

भारत में हमें तरह-तरह की पौराणिक कथाएं पढ़ने को मिलती है. इसमें कोई दोराय नहीं कि भारत के इतिहास को हम जितना भी जानना चाहे उतना कम है.

हम आपको एक ऐसी हनुमान जी की कहानी बताने जा रहे है जो बहुत ही दिलचस्प है. ये घटना हनुमान जी और सीता मईया के बीच घाटी थी और तब से ही ये एक नया इतिहास बन गयी. तो आईये पढ़ते है हनुमान जी की पौराणिक कथा जो बहुत दिलचस्प है इसलिए अंत तक ज़रूर पढ़े.

आपने हनुमान जी की केसरी रंग की मूरत मंदिरों में ज़रूर देखि होगी लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि उनकी ये मूरत केसरी रंग की क्यों होती है. बच्चे ये सवाल अक्सर करते है और इस हनुमान कहानी को पढ़कर आपको भी जवाब मिल जाएगा और आप अपने बच्चो को भी अच्छे से समझा सकेंगे.

एक बार हनुमान जी ने सीता मईया को सिन्दूर से अपनी मांग भरते देख लिया. उनसे रहा ना गया और उन्होंने तुरंत सीता माता से जाकर पुछा “हे देवी, ये सिन्दूर से मांग भरने का क्या महत्त्व है, कृपया मेरी दुविधा दूर करे”

सीता माता ने इसका हनुमान जी को बहुत सुन्दर जवाब दिया “हनुमान…स्त्रियां अपनी मांग में सिन्दूर इसलिए लगाती है ताकि वो जग ज़ाहिर कर सके कि उनके लिए पति की अहमियत सबसे ज़्यादा है. सिन्दूर पति की लम्बी आयु के लिए लगाया जाता है और जो कोई भी स्त्री सिन्दूर लगाती है माता पार्वती उसके पति की रक्षा आवश्य करती है”

ये सुन कर हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर लगा लिया क्यूंकि वे भी अपने श्री राम की लम्बी आयु की कामना करते थे. तब से हनुमान जी रोज़ अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर ग्रहण करने लगे और इसीलिए मंदिरो में हनुमान जी की मूरत सिन्दूरी रंग की होती है.

हनुमान जी की मूरत पर सिन्दूर क्यों लगाया/चढ़ाया जाता है?

जब भगवान् राम ने देखा कि हनुमान ने अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर लगाया हुआ तो इसका कारण पुछा. इसके जवाब में हनुमान जी ने कहा “हे भगवन, सीता माता ने कहा था कि ज़रा सा सिन्दूर सिर पर लगाने से आपकी आयु लम्बी हो जायेगी. अगर ज़रा सा सिन्दूर लगाने से आपकी आयु लम्बी हो सकती है तो अगर मैं अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर लगा लू तो अवश्य ही इसका बहुत अच्छा प्रभाव होगा.”

श्री राम हनुमान की श्रद्धा से बहुत प्रसन्न हुए और ये वरदान दिया कि जो भी भक्त हनुमान को सिन्दूर लगाएगा या हनुमान की सिन्दूर के साथ पूजा करेगा उसे लम्बी आयु, यश और खुशहाली मिलेगी. और तब से भक्त जन हनुमान जी की मूरत पर सिन्दूर लगाते और चढ़ाते है.

Vineet

नमस्ते। मुझे नयी कहानियां लिखना और सुनना अच्छा लगता है. मैं भीड़-भाड़ से दूर एक शांत शहर धर्मशाला (H.P) में रहता हूँ जहाँ मुझे हर रोज़ नयी कहानियां देखने को मिलती है. बस उन्ही कहानियों को मैं आपके समक्ष रख देता हूँ. आप भी इस वेबसाइट से जुड़ कर अपनी कहानी पब्लिश कर सकते है. Like us on Facebook.

You may also like...