सुनो सबकी करो मन की – Moral Story for Children in Hindi

चिल्ड्रन स्टोरी इन हिंदी – Moral Story for Children in Hindi

सुनो सबकी करो मन की

एक गांव में गौरी नाम की बुद्धिमान लड़की थी। वह पढ़ाई के साथ – साथ हर एक विषय में बुद्धिमान थी, जैसे नृत्य में, गीत-संगीत, रंगोली,क्रिड़ा में आदि। वह अपने परिवार और सबसे मिल जुल के रहती थी। पर उसमें एक कमी यह थी कि वह हर किसी कि बातों पर झट से यकीन करती थी।

उस लड़की कि एक पायल नाम की सहेली थी। पायल,गौरी की सहेली सिर्फ नाम की थी दरअसल वह गौरी से अन्दर ही अन्दर जलती थी। लेकिन गौरी ,पायल को अपनी सच्ची सहेली मानति थी और हर एक मन की बात कह डालति । जिस से पायल उसका फायदा उठाने लगी। गौरी, पायल की हर एक बात पर विश्वास करती थी। गौरी की एक और सहेली थी रूपा, कठोरता से बोलने के कारण उससे सभी कम ही बोलते, लेकिन रूपा मन से बहुत ही अच्छी थी। रूपा, हर बार पायल को समझाने की कोशिश करती कि लोग कुछ भी तुमसे कहे परन्तु अगर मन में सच्चाई हो तो हमेशा अपनी मन की सुने और दूसरो की बात पर झट से यकीन न करें परन्तु गौरी उसे अनसुनी कर देती।

Moral Story for Children in Hindi

एक दिन की बात है, नैशनल स्कूल क्विज कोपींटेशन का नोटिस आया, कक्षा में सबसे पहले गौरी का नाम लिखा गया। यह देख पायल उससे मन ही मन जलने लगी और गौरी को इस कॉम्पिटेशन से हटाने की योजना बनाई। पायल ने कहा,”गौरी जानती हो, इस कोपींटेशन में ऐसे-ऐसे विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया है कि जिसके आगे अब तक कोई ठिक नहीं पाया है। तुमने तो बेकार में हिस्सा लिया। मन ही मन गौरी अपने आप को हारी हुई समझने लगी और अगले ही दिन अपना नाम लिस्ट से हटा देती है। गौरी के बदले रुपा का नाम लिस्ट में डाल दिया जाता है। रुपा, गौरी को नाम हटाने का कारण पूछती है, पर गौरी कुछ नहीं बताती।

कुछ  दिनो बाद एक स्कूल में क्विज कोपींटेशन रखा जाता है। हर एक स्कूल के बच्चे हाल में इक्कठा हुऐ।  जज द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्न का उत्तर गौरी को सहजता से आता था। वहीं उन विद्यार्थियों को कम आता था। आखिर रूपा जीत जाती है। रूपा  को दस हजार रुपए तक का इनाम दिया जाता है, यह देख गौरी को पछतावा होता है। रूपा, गौरी से कहती हैं,”मैं हमेशा अपने मन की सुनति हूं”। इसलिए किसी ने सच ही कहा है,”सुनो सबकी करो मन की”।

तात्पर्य यह है कि अगर‌ मन में सच्चाई हो तो हमेशा अपनी मन कि सुने । जिससे हम जीवन में आगे बढ़ सके।

Thanks

Aarti Kulkarni 

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1 Response

  1. Gauri Chamchi says:

    Nicely written 👌 good moral…

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