अत्याचारी बेटा (भाग -१) – Sad Story About Father and Son in Hindi

मां बाप की दुख भरी कहानी – Heart Touching Emotional Story about Parents in Hindi

दोस्तों, आज मै कई बच्चों को देखता हूं, आपने भी इस सृष्टि में बहुत सारे ऐसे बच्चे देखे होंगे; वो जब छोटे होते है, तो बहुत अच्छे होते है; अपने माता – पिता का ध्यान रखते है, उनकी बाते मानते है; लेकिन जैसे-जैसे वो बड़े होते जाते है, अपने माता-पिता को भूल जाते है और कुछ बच्चें तो बड़े होकर अपने मां – बाप के साथ अभद्र व्यवहार करते है। मुझे बहुत दुःख होता है, जब मैं ऐसी घटनाएं देखता हूं, सुनता हूं। आज मैं अपनी कल्पनाओं से, इसी विषय पर, एक काल्पनिक कहानी साझा करने जा रहा हूं। उम्मीद रखता हूं, आपको यह कहानी पसंद आएगी।

Heart Touching Mother Son Story In Hindi

Heart Touching Mother Son Story In Hindi

शंकरपुर गांव में हनुमानप्रसाद, अपनी पत्नी कौशल्या के साथ रहता था। थोड़े दिन पहले ही कौशल्या ने एक पुत्र को जन्म दिया था, इसलिए घर में खुशहाली का माहौल था। थोड़े दिन बाद बच्चे का नामकरण हुआ। बच्चे बहुत ही प्यारा नाम दिया गया, सुशील। हनुमानप्रसाद पूरा दिन खेती बाड़ी में व्यस्त रहते थे, लेकिन शाम को घर आते ही सुशील को देखकर, उनके चेहरे पर रौनक आ जाती। हनुमानप्रसाद और कौशल्या, सुशील के साथ खेलते, उसके साथ मस्ती करते और सुशील की हर एक बात का ध्यान रखते। सुबह सुशील के पापा, जब खेती बाड़ी के लिए निकलते, तो कौशल्या को बोलकर जाते, की वह सुशील का ध्यान रखे। कौशल्या पूरा दिन सुशील को संभालती, साथ में खाना करती और घर की देखभाल भी करती। कौशल्या, सुशील की सारी शरारतो को झेलती। धीरे-धीरे सुशील बड़ा हुआ। हनुमानप्रसाद ने कौशल्या को कहा, “ अब हमारा बेटा बड़ा हो रहा है, अगले साल हम उसे स्कूल में भेजेंगे। उसका जो भी सपना है, हम दिन – रात मेहनत करेंगे और अपने बेटे को पढ़ाएंगे। देखना हमारा बेटा एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनेगा और हमारा नाम रोशन करेगा।” कौशल्या ने हां कहकर उनकी बातों को सराहना दी।

parents sad story in hindi

Parents Sad Story in Hindi

अगले साल सुशील को स्कूल भेजा गया। कुछ दिनों में ही सुशील के शिक्षक ने समझ लिया, की सुशील को पढ़ने में बहुत रुचि है। सुशील स्कूल से घर आने के बाद, बाकी सब बच्चों की तरह खेलने जाता। फिर घर आकर पढ़ाई पे ध्यान देता। वह अपने माता-पिता का भी बहुत ध्यान रखता। कभी उनके माता-पिता का सिर दर्द करता, तो वह प्यार से मालिश कर देता। कभी पिता के लिए दवाई लानी हो बाजार से, तो भी सुशील चला जाता। हनुमानप्रसाद, सुशील को श्रवण मानते थे; क्यों की वह श्रवण की तरह की उनकी देखभाल और सेवा करता था। सुशील पढ़ने में बहुत होशियार था, इसलिए वह स्कूल की हर एक कक्षा में अव्वल आता। स्कूल के अभ्यास के बाद, अब सुशील का सपना था की वह अब उच्च अभ्यास के लिए शहर में जाए। सुशील डॉक्टर बनना चाहता था। उच्च अभ्यास के लिए काफी पैसों की जरूरत थी। हनुमानप्रसाद के पास इतने पैसे नहीं थे। उन्होंने एक जमीनदार से कुछ कर्जा लेकर, सुशील को उच्च अभ्यास के लिए भेजा। हनुमानप्रसाद ने शहर में ही कही पे, उसका रहने का भी बंदोबस्त कर दिया, ताकि उसको तकलीफ न हो और आराम से पढ़ सके।

शहर में जाते ही सुशील की दोस्ती कुछ ऐसे दोस्तों से हुई; जिन्होंने सुशील को पूरी तरह बिगाड़ दिया। जिस सुशील को कोई बुरी आदत नहीं थी, वह अब ड्रग्स और शराब का नशा करने लगा। सिगरेट पीना, शराब पीना, ड्रग्स लेना, अब सुशील की एक ये आदत बन गई। अब वह इतना बिगड़ चुका था, की वह अपने सब संस्कार भूल गया । एक दिन वह काफी महीनों के बाद, अपने घर आया। हनुमानप्रसाद और कौशल्या उसको देखकर बहुत खुश हुए और दोनों ने उसको गले लगाया। सुशील के पास पहुंचकर कौशल्या ने महसूस किया, की सुशील शराब पीके आया है। कौशल्या ने सुशील को एक थप्पड़ मारी, सुशील जमीन पर गिर पड़ा। कौशल्या ने कहा, “ क्या यही सब करने के लिए हमने तुम्हें शहर में भेजा था ? देखो, जो बच्चा एक मीठी सुपारी तक नहीं खाता था, आज शराब पीके आया है। पता नहीं और क्या-क्या नशा करता होगा?” हनुमानप्रसाद ने भी सुशील को दो-चार थप्पड़ लगा दिए। सुशील फिर नीचे गिर पड़ा। फिर वो खड़ा हुआ और कहा,“ हां पी है मैने शराब, तो क्या हुआ? सारे नशे करता हूं मैं सब। तंबाकू, सिगरेट, ड्रग्स, शराब, आदि। क्या गलत किया मैने ? और में आपको आपको एक बात बता दू, मैं अब कोई पढ़ाई नहीं करूंगा। मेरा मन नहीं है, आपके पास जो जमीन है, धन-दौलत है, वो आपने मेरे लिए तो बचा के रखी है। बस अब आराम से जिंदगी जिएंगे।” यह कहकर उसने अपने वकील को बुलाया, हनुमानप्रसाद के जबरदस्ती हस्ताक्षर लिए और सारी जमीन अपने नाम कर ली। हनुमानप्रसाद ने उसको रोकने की कोशिश भी की थी, लेकिन सुशील ने अपने पिता को कहा की, “ बुड्ढे, पूरी जिंदगी तो ऐश किया, अब थोड़ा हमें भी ऐशोआराम से जीने दो। अभी वैसे भी अभी आप बूढ़े हो चुके हो, ईश्वर का बुलावा कभी भी आ सकता है? क्या ये जमीन सब आप ऊपर लेके जाओगे? मेरी मानो, दो रोटी खाओ और प्रभु के भजन करो अब। आपकी जमीन और मां के गहने बेचकर मैं बहुत अमीर बन जाऊंगा।”

Father and Son Emotional Story in Hindi

Father and Son Emotional Story in Hindi

हनुमानप्रसाद ने उसको लकड़ी से मारने की कोशिश की, लेकिन सुशील ने लकड़ी पकड़कर, दोनों को लकड़ी से मारकर, धक्के मारे और घर से बाहर निकाल दिया। फिर उसने सारी जमीन, गहने सब बेच दिया और एक लड़की से शादी कर ली। लड़की भी उसकी तरह ही थी क्रूर और अत्याचारी। हनुमानप्रसाद ने कुछ दिनों के बाद एक बार फिर इसके घर जाने का निर्णय लिया; लेकिन सुशील और उसकी पत्नी सविता ने उनको धक्के मारकर घर से बाहर निकाल दिया और कहा, “अगली बार इस घर मैं आने की हिम्मत भी मत करना। ये घर मेरा और सुशील का है, तुम्हारा नहीं, समझे। निकल जाओ मेरे घर से।” हनुमानप्रसाद ने ऊपर आसमान में देखा और कहा, “ वाह रे ईश्वर! क्या यही दिन दिखाने के लिए मुझे जिंदा रखा था। बुलाले मुझे अपने पास, नहीं जीना ऐसी जिंदगी मुझे। ऐसे क्रूर और पापी बेटे का बाप कहलाने से अच्छा है, की मैं मर जाऊं। बेटा आज से तू मेरा पुत्र नहीं और मैं तुम्हारा पिता नहीं। समझ लेना, की तुम्हारे पिता अब मर चुके है।”

फिर हनुमानप्रसाद तेज़ी से एक तालाब की तरफ बढ़ने लगे, खुदकुशी करने के लिए। वो बस तालाब से कुछ ही कदम दूरी पर थे, तुरंत कौशल्या ने उनको रोक लिया और संभाला। “ आप हिम्मत मत हारो। ईश्वर हमारी परीक्षा ले रहा है। हमारी परवरिश में तो कोई खोट नहीं थी। अगर हमारा बेटा ही क्रूर और पापी निकला, तो इसकी सजा हम स्वयं को क्यों दे?” कौशल्या ने हनुमानप्रसाद को संभालते हुए कहा। दोनों ईश्वर से प्रार्थना करने लगे की वह कोई मार्ग बताए। क्यों की वो दोनों इस उम्र में जाए तो कहा जाए? मंदिर में ईश्वर के पास बैठकर,बिना कुछ खाए दोनों ने एक दिन बिताया। फिर दोनों ने उसको गांव को छोड़ दिया और ईश्वर से प्रार्थना करते-करते एक लंबे सफर पर निकल पड़े, जिसकी कोई मंजिल नहीं थी। बस, अब तो ईश्वर का की सहारा था, जहा ईश्वर ले जायेंगे वहा वो जायेंगे।

यहां सुशील और सविता, हनुमानप्रसाद के घर में मजे से रहने लगे। सुशील कोई काम-धंधा नहीं करता था। पूरा दिन घर पे अपने दोस्तों को बुलाकर ड्रग्स और शराब का नशा करता, दोस्तों के साथ इधर-उधर की बातें करता, गप्पे लड़ाता। उसकी पत्नी भी उसमे उसका साथ देती।

( दोस्तों, कैसा लगा आपको भाग -१? ऐसे क्रूर और पापी बेटे की क्रूरता देखकर, मेरी तरह आपकी भी आंखो में अश्रु आए होंगे और बहुत गुस्सा भी आया होगा। अब सोचिए, हनुमानप्रसाद और कौशल्या का क्या होगा? कौन मसीहा बनेगा उनका?)

भाग -२ बहुत ही जल्द…

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1 Response

  1. Suresh Kumar says:

    Wow Aashish bhai jordar story jo kar raha he sushil or uski wife galat hai bude ma or bap ki seva karni chahiye n ki unko dakka mukki gussa to muje bhi aa raha he but kiya kre so ready 2 part start

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