एक अनोखा प्यार – Amazing Love Story in Hindi

Amazing Love Story in Hindi

केलनपुर गांव में प्रेम नाम का,एक लड़का रहता था। वह बचपन से ही बहुत सुशील और संस्कारी था। उसके ज्यादा मित्र भी नहीं थे। वह १२ वी कक्षा में पढ़ रहा था। वह लड़कियों से ज्यादा बात भी नहीं करता था। बचपन से ही बहुत शर्मीला लड़का था। उसको क्रिकेट खेलना बहुत अच्छा लगता था। रोज वो चित्र बनाने के बाद, १ घंटे अपने कुछ दोस्तों के साथ, वह क्रिकेट खेलने जाता।

प्रेम को पढ़ाई में उतनी रुचि नहीं थी। उसके बस औसत मार्क्स आते; लेकिन वह चित्र अच्छा बना लेता था। चित्रकारी में उसको बचपन से ही बहुत ज्यादा रुचि थी। १२ वी कक्षा के बाद, उसने उच्च अभ्यास के लिए कॉलेज में प्रवेश लिया। कॉलेज के पहले साल में उसके कम मार्क्स आने की वजह से, उसके पापा ने उसको बहुत डाटा और कहा, “ बेटा, तूझे मैंने कितनी बार कहा है, की पढ़ाई – लिखाई में ध्यान दे, लेकिन तुम मेरी बात ही कहा सुनते हो! समाज में, क्या मुंह दिखाऊंगा मैं? कभी भी अच्छे मार्क्स नहीं लाता। वो रिनाजी की बेटी को देखो, हर बार अव्वल आती है और तुम मेरा नाम खराब कर रहे हो।”

Amazing Love Story in Hindi

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पिता की डाट सुनकर प्रेम, केलनपुर से दूर जा रहा था। उसको खुद पता नहीं था, की वो कहा जा रहा है? चलते – चलते दूसरा गांव आ गया, जिसका नाम था, रानीपुर। रानीपुर गांव के बाजार में, एक युवती अपने लिए खुबसूरत दुपट्टा देख रही थी। प्रेम की नजर उस युवती पे पड़ी और प्रेम उसको देखकर मंत्रमुग्ध हो गया। कुछ पलों के लिए वह अपनी नजरे, उस युवती से हटा ही नहीं पाया! उस युवती का चेहरा, उसकी आंखे, उसका वो दुपट्टा, ये सब प्रेम के मन में बस गया। कुछ पलों के बाद, उस युवती की एक सहेली ने उसको पुकारा, “ परी, चलो कितनी देर ओर!” फिर वो अपनी सहेली के साथ चली गई। “ परी, वाह ! कितना प्यारा और खूबसूरत नाम है। परी, बहुत प्यारी हो तुम!” प्रेम, मन ही मन, यह बात दोहराने लगा। उसको पहेली नजर में ही परी से प्यार हो गया।

उसके दिलों – दिमाग में बस वही छाई हुई थी। थोड़ी देर बाद, प्रेम के पापा का कॉल आया। प्रेम को ३_४ बार कॉल किया, लेकिन प्रेम ने कॉल का जवाब नहीं दिया; क्योंकि वह परी के विचारो में इतना मग्न था,की उसको कोई होश नहीं था। कुछ देर बाद, उसने अपना फोन देखा, तो उसको पता चला, की उसके पापा के ४ कॉल्स आए थे। उसने अपने पापा को कॉल किया, “ पापा सॉरी !” “बेटा, सॉरी तो मुझे बोलना चाहिए, मैंने बहुत ज्यादा ही डाट दिया था, आज तुझे। तु घर आजा बेटे, तुम्हारी मम्मी बहुत चिंता कर रही है। ” उसके पापा ने कहा। “हां, मैं अभी घर आ रहा हूं। ” कहकर प्रेम ने कॉल को समाप्त किया।

घर आने के बाद, उसने मम्मी – पापा के साथ कुछ देर बात की, फिर वो खाना खाकर, अपने कमरे में चला गया। अगले कुछ दिनों तक उसको नींद ही नहीं आई, उसको बस, हर तरफ परी दिखाई दे रही थी। उसके ही विचार, उसका ही चेहरा, उसकी आंखे सब उसको याद आया। परी की तस्वीर उसके मन में बस चुकी थी। प्रेम को उससे मिलने की इच्छा हुई। वह फिर एक बार रानीपुर में गया, उसने पूरा दिन उसका इंतजार किया; लेकिन परी उसको दिखाई नहीं दी। उसने अपने कुछ दोस्तों से अपने मन की बात की। उसके उस दोस्तों ने बहुत पता लगाया, लेकिन वह युवती के बारे में, किसीको पता नही चला। आखिर में, प्रेम के एक दोस्त ने बताया की, “ प्रेम, अब तुम उसको भूल जाओ, मैंने उसका पता लगा लिया। वह युवती, दूसरे किसी शहर से आई थी, १-२ दिन के लिए। अब वह कहा पे है, नहीं पता। मुझसे जितना हो सकता था, उतना मैंने पता करके तुम्हे बताया।”

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प्रेम उदास होकर घर चला गया। कुछ दिनों प्रेम ने उसको भुलाने का भी प्रयास किया; लेकिन वह उसे भुला नहीं पाया। उसने उसका एक चित्र बनाया और अपने कमरे में लगा दिया। वह दिन-रात उस चित्र को निहारता और उसकी यादों में खोया रहता। वह मन ही मन बोलने लगा ,“ परी, मुझे यह तो नहीं पता की, तुम मुझे दोबारा मिलोगी या नहीं, लेकिन मुझे इतना जरूर पता है, मेरा प्यार तुम्हारे प्रति सच्चा है, में अपना मन तुम्हे दे चुका हूं, अब तुम आओ या न आओ, यह मन केवल तुम्हारा ही रहेगा, यह स्थान ओर कोई ले नहीं पायेगा।” कॉलेज से घर आने के बाद, वह सीधा अपने कमरे में चला जाता और अपनी परी की यादों में खोया रहता। उसने अपनी चित्रकारी से, उसकी कुछ ओर तस्वीरें बनाई। कुछ तस्वीरों को उसने अपने बैग में रख दिया। कॉलेज में कुछ लेक्चर के बाद, वह बगीचे में जाकर उस तस्वीरों को निहारता और परी को याद करता। वो जब भी अपनी आंखे बंद करता, उसको परी की वही आंखे, चहेरा और खुबसूरत दुपट्टा दिखता, जो उसने पहली नजर में देखा था।

प्रेम रोज रानीपुर गांव में जाता और जहां से परी ने दुपट्टा खरीदा था, वहा पे जाके कुछ देर तक परी की प्रतीक्षा करता। उसको पता था की वह नहीं आयेगी, लेकिन फिर भी वह उसका इंतजार करता रहा। उसने परी के लिए एक दुपट्टा भी लेकर रखा था, जो परी की तरह ही प्यारा था! प्रेम ने ५ साल तक उसका इंतजार किया। ५ साल के बाद, परी तो वहां पे नहीं आई, लेकिन उसकी वह सहेली उसको दिखाई दी, जो उस दिन परी के साथ दुपट्टा खरीदने आई थी। प्रेम को पता नहीं था, की वही सहेली है,जो परी के साथ उस वक्त थी; क्योंकि प्रेम की नजरे उस वक्त सिर्फ परी को निहार रही थी। प्रेम को रोज उस जगह पे आते हुए देख, उसने उस दुपट्टेवाले अंकल से पूछा उसके बारे में। दुपट्टेवाले अंकल ने सारी कहानी बता दी…

A Unique Love Story In Hindi

 दूसरे दिन परी की वो सहेली, प्रेम से मिली और विस्तार से उसको सुना। प्रेम ने अपनी सारी प्रेम कहानी उसको बताई। उसकी कहानी सुनकर, परी की सहेली की आंखो में आंसू आ गए। उसने रात को ही कॉल पर, परी को ये सारी बातें बता दी। परी ने यह बात सुनकर, अपनी सहेली को कहा की, “ कल में गांव आ रही हूं, प्रेम को कहना की शाम को ५ बजे, उसी बाजार के पास आए, जहां से हमने दुपट्टा लिया था।” यह बात कहकर कॉल समाप्त किया और वह भी प्रेम के ख्यालों में डूब गई और उसका भी बहुत मन किया उससे मिलने का।

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अगले दिन ठीक ५ बजे, प्रेम वहां पे पहुंच गया और ५ मिनिट के बाद परी वहां पे आई। प्रेम की आंखे परी की आंखो को इस तरह निहार रही थी! जैसे की मानो, सदियों की उसकी तपस्या पूर्ण हुई। प्रेम की आंखो से अश्रु बहने लगा। परी, प्रेम के पास आई और अपने हाथों से प्रेम के अश्रु पोछे। फिर कहा,“ प्रेम, इतना प्यार करते हो मुझसे! मेरे लिए तुमने इतना इंतजार किया, रोज यहां पे आके मेरी प्रतीक्षा करते, रोज मुझे दिन -रात याद करते, मेरी तस्वीरें बनाकर, उसमे खोए रहते। तुम्हारा प्यार में स्वीकार करती हूं। बस, यह समझ लो कि तुम्हारी बरसो की तपस्या अब पूर्ण हुई। मैं आ गई हूं ना! अब बिल्कुल भी रोना मत। मैं तुम्हे खुश देखना चाहती हूं। मैं अब तुम्हे छोड़कर कही नहीं जाऊंगी। हमेशा तुम्हारे पास रहूंगी, तुम्हारे दिल में!” यह बात कहकर, उससे रहा नहीं गया और उसने प्रेम को गले से लगा लिया। दोनों कुछ देर तक बहुत रोए और फिर दोनों एक -दुसरे में खो गए, जैसे नदियां सागर में मिलती है! फिर प्रेम ने, परी को दुपट्टा दिया, जिसको उसने परी के लिए खरीदा था। परी ने उस दुपट्टे को ओढ़ लिया और बड़े प्यार से मुस्कुराई।

उस दिन पश्चात, प्रेम और परी दोनों रोज मिलने लगे और खूबसूरत प्यारभरे पल बिताने लगे।

( सूचना – यह कहानी काल्पनिक है। इस कहानी में दिए गए सारे पात्र और जगह भी काल्पनिक है। किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा उद्देश नहीं है। )

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