आज़ादी सबको प्यारी हैं – Azadi Sabko Priya hai

आज़ादी सबको है ज़िन्दगी से प्यारी ! एक पक्षी के दृष्टिकोण से तत्पार्य है स्वछंद रूप से उड़ना. आसमान में अपने पंखो को फैलाकर निडर होकर उड़ना. अपनी इस विचारधारा को सबके समक्ष रखना जिसे हम अंग्रेजी में फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेसशन कहते है .आज की कहानी आज़ादी यानी “स्वतंत्र होकर जीने की चाहत “पर आधारित है.

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लीला दस साल की लड़की थी. लीला देहरादून के छोटे से शहर में रहती थी. लीला अपने परिवार की लाड़ली थी. उसे प्रकृति और पशुओं से अधिक प्रेम था. एक दिन उसके दादाजी घर पर एक तोता ले आये. तोते को देखकर लीला की ख़ुशी का ठिकाना न रहा.

Azadi Sabko Priya hai

लेकिन तोता पिंजरे में कैद था, जिसे देख लीला उदास हो गयी और कहा कि” यह पक्षी पिंजरे में कैद है “. दादाजी ने कहा अगर पिंजरे में कैद नहीं रखेंगे तो वह उड़ जायेगी. लीला तुम इससे दोस्ती कैसे करोगी.” लीला तोते को बड़े नाज़ुक तरीके से पालन-पोषण करती. लीला हमेशा तोते से बात करती और ध्यान रखती.

तोता धीरे-धीरे सबसे घुलने-मिलने लगा. लीला प्यार से तोते को “प्यारी” नाम कहकर पुकारती.

कुछ महीने पश्चात तोते ने लीला से कहा -“यह पिंजरा बहुत छोटा है. जब में वन में रहती थी, तो मेरे साथी मेरे संग खेलते थे. एक डाल से दूसरे डाल पर बैठती थी और बेर खाती थी. मैं उसकी कमी महसूस करता हूँ. गगन में स्वछंद रूप से जीने कि चाहत मैं छोड़ चूका हूँ. यह बात सुनकर लीला कि आँखे नम हो गयी. उसने कहा कि ” क्या तुम यहाँ खुश नहीं हो ?”

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प्यारी ने दबे हुए स्वर में कहा कि ” मैं यहाँ खुश तो हूँ मगर जंजीरों में बंधे रहना, किसको है पसंद “.

लीला पर इसका गहरा असर पड़ा और इस बात का एहसास हुआ कि स्वतंत्रता सभी का जन्मसिद्ध अधिकार है. सिर्फ मनुष्य नहीं हर प्राणी को स्वछंद रूप से जीने का अधिकार है. इसलिए उसने अगले दिन प्रातःकाल चुपचाप प्यारी को उस पिंजरे से आज़ाद कर दिया. दादाजी को जब इस बात का ज्ञात हुआ, तो उसने लीला की सराहना की. लीला ने अपने दिल पर पत्थर रखकर प्यारी को आज़ाद कर दिया. ताकि वह अपनों के साथ स्वतंत्रतापूर्वक रह सके.

इस छोटी सी कहानी से हमे यह सीख मिलती है कि आज़ाद होने का हक़ हम सबको है. बाल गंगाधर तिलक ने कहा था “स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे हम लेकर रहेंगे”

आज़ादी का सम्मान हम सभी को करना चाहिए. आज हम वनो को काटकर अपना आशियाना बना रहे है लेकिन हम यह कब सोचेंगे कि पशु-पक्षियों को भी जीने का उतना अधिकार है जीतना हमें.

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दोस्तों, Azadi Sabko Priya hai कहानी कैसी लगी, हमें जरूर बताये और आपके पास भी कोई कहानी हो, तो हमें मेल करे, जल्दी पब्लिश किया जायेगा।

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