भीम और हनुमान जी की धार्मिक कथा – God Story in Hindi

Bhim and Hanuman Story in Hindi

महाभारत की लड़ाई और इसके किरदारों के बारे में तो हम सब जानते ही है। हमे बचपन से ही महाभारत ग्रन्थ के बारे में पढ़ाया गया है। इस ग्रन्थ में एक ऐसा किरदार था जिसके बारे में लोग आज भी बाते करते है। भीम सारे पांडव भाइयों में सबसे शक्तिशाली था और कहा जाता है भीम के अंदर 100 हाथियों की शक्ति का बल भी था। लेकिन कभी कभी ये वरदान किसी ना किसी इंसान को घमंडी बना ही देता है। ऐसा ही एक किस्सा भीम के साथ हुआ था, जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते है।

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एक वानर ने तोड़ा भीम का घमंड

एक समय की बात है जब भीम जंगल से गुज़र रहे थे। उस दौरान भीम पांडवो को मिली लज़्ज़ा से काफी गुस्सैल किस्म के बन गए थे। उस समय वन से गुजरते हुए उन्हें रास्ते में एक वानर दिखाई दिया जो उनके रास्ते को रोक कर लेटा हुआ था। उस वानर को बीच रास्ते में लेटा देख भीम को गुस्सा आ गया क्यूंकि उससे पहले कभी किसी ने भीम का रास्ता नहीं रोका था। उस वानर को बीच रास्ते में पूँछ फैलाये देख भीम ने उससे अपनी पूँछ हटाने को कहा लेकिन उस वानर ने ये कहते हुए पूँछ हटाने से इंकार कर दिया की वह बूढा है और खुद पूँछ नहीं हटा सकता।

पूँछ नहीं हटा पाये भीम, वानर ने दिया अपना परिचय

भीम को अपनी शक्ति पर काफी घमंड था लेकिन वो लाख कोशिशों के बाद भी उस वानर की पूँछ को अपनी जगह से हिला तक नहीं पाया। इसके बाद भीम को काफी आश्चर्य हुआ और अपने घुटनों पर बैठते हुए उसने वानर से पूछा की ‘मैं आपकी पूँछ तक नहीं हिला पाया, आप है कौन’। तभी उस वानर ने अपना परिचय दिया और बताया कि वो रामायण काल के हनुमान थे। वानर ने आगे कहा कि तुम्हारे पास कितनी भी शक्ति हो लेकिन अगर तुम्हारे पास श्रद्धा और विनय नहीं है तो तुम्हारा पतन जरूर होगा।

कृष्ण ने की थी ये सारी रचना

सभी पांडव भाइयों में अर्जुन और भीम में सबसे ज्यादा घमंड था इसलिए ये सब कृष्ण द्वारा घमंड तोड़ने के लिए ही रचा गया था। भीम की तरह अर्जुन को भी यही लगता था कि उसे कोई नहीं हरा सकता। इसी वजह से कृष्ण उसे हर बार यही समझाते थे की रणभूमि में सामने वाला मूर्ख नहीं है इसलिए कभी घमंड मत करो। तुम एक दिन तीर से नहीं बल्कि अपने घमंड से मारे जाओगे। इसी वजह से ये दोनों परिस्थितियां इस प्रकार से प्रस्तुत की गयी ताकि कलयुग में लोग घमंड से दूर रहे।

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