यूँ तो सब सुख है बरसे पर दूर तू है घर से – भारत से विदेश तक का मेरा अनुभव, भाग 1

आज मैं सऊदी अरब जा रहा हुं।आधुनिक जीवन की मूलभूत आश्यकताओं को पूरा करने की गरज से मैं पहली बार अपने देश से किसी दूसरे देश प्रवास करने जा रहा था। दिल्ली का आईजीआई एयरपोर्ट जो अपनी कड़ी सुरक्षा निति विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है।जीवन में पहली बार मैं ने किसी एयरपोर्ट के अंदर प्रवेश किया था। सामान एवं टिकट प्रक्रिया को पूरा करने के बाद मैं सीधा इमिग्रेशन काउंटर की तरफ चला गया और लाइन में लग गया।फिर कड़ी सुरक्षा जांच नियम को पूरा करते हुए आगे बढ़ गया।

इमिग्रेशन प्रक्रिया से निकलने के बाद मैं प्रस्थान टर्मिनल पर रियाद जाने वाली फ़्लाइट के गंतव्य समय का इंतजार करने लगा। मेरे जैसे बहुत से लोग अपनी आंखों में हजारों सपनों को पिरोए हुए जीवन को सरल बनाने की उम्मीद को लेकर अपने बचपन एवं परिवार को छोड़ कर एक अनजान देश में जा रहे थे।सुबह के 5 बज रहे थे ऑन बोर्डिंग अनाउंस हुआ। सभी यात्री विमान में चढ़ने के लिए लाइन में लग गए।

किसी छोटे बच्चे की भांति मेरे मन में उत्सुकता थी कि कब मैं विमान में जल्दी से चढ़ जाऊं। फिर आखिरकार मैं विमान में अंदर पहुंच कर, सीट संख्या निर्देशों का पालन करते हुए अपनी सीट पर जा कर बैठ गया। मेरी सीट खिड़की के पास थी।बाहर का नज़ारा देख कर मन दुखी सा हो रहा था शायद कुछ पल में अपना देश अनिश्चित काल के लिए छोड़ दूंगा। एयर हॉस्टेस के द्वारा सुरक्षा बेल्ट एवं आपातकालीन परिस्थितियों के बारे में जानकारी दी गई। एयर हॉस्टेस का विनम्र स्वभाव एवं जिस शालीनता से वह प्रत्येक यात्रीयों का अभिवादन कर रही थी मन को बड़ा अच्छा लगा।

कुछ समय बाद विमान ने तेज़ी से रनवे पर दौंडना शुरू किया। अति तीव्र आवाज एवं गति के साथ विमान रनवे पर दौड़ने लगा तथा मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा। और फिर विमान अचानक ऊपर को उठने लगा और पल भर में हजारों फीट ऊपर पहुंच गया। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली फिर कुछ देर बाद आंखों को खोल कर नीचे देखा तो सब छोटा छोटा दिखने लगा। यह मेरे जीवन का एक नया अनुभव था।

फिर धीरे धीरे विमान बादलों के बीच से उड़ने लगा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो रूई के अथाह पहाड़ के ऊपर से उड़ रहे हों। हवाई जहाज़ की यात्रा करना एक अलग ही एहसास दिला रहा था। कुछ समय बाद एयर हॉस्टेस के द्वारा खाना खाने के लिए दिया गया जो बिल्कुल मुफ्त था और अच्छा भी था। खाना खाकर मन को थोड़ा अच्छा एहसास हुआ। इस उत्सुकता भरी यात्रा का आनंद लेते लेते और बादलों को देखते देखते मैं ना जाने कब सो गया पता ही नहीं चला। फिर मेरी आंख अचानक से खुली शायद कुछ अनाउंस हो रहा था। मिली जानकारी के अनुसार हम रियाद एयरपोर्ट पर कुछ समय में पहुंचने वाले थे।

विमान धीरे धीरे अचानक से कई सौ फीट नीचे हो जा रहा था कि मानों गुदगुदी सी हो जा रही थी। नीचे रियाद शहर दिखाई दे रहा था और कुछ ही पल के बाद एयरपोर्ट का रनवे दिखने लगा। विमान बहुत तेज़ी से कई सौ फीट नीचे आ गया। अचानक कान के पर्दे सुन्न से हो गए मानो किसी ने कान में कुछ डाल दिया हो शायद यह वायु दबाव परिवर्तन की वजह से था। फिर विमान रनवे पर लैंड हो गया और ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा देता हुआ तीव्र गति से दौड़ने लगा। धीरे धीरे विमान की रफ्तार में कमी आती गई और जान में जान आ गई। अंततः हम रियाद एयरपोर्ट पर पहुंच गए। हैंड बैग को लेकर एयरपोर्ट के आगमन टर्मिनल के अंदर आए और वीजा संबंधित प्रक्रिया को यहां भी दोहराया गया।

सऊदी इस्लामी सिद्धांतो पर अनुशासित, एक राजशाही देश है। सऊदी अरब अपने कड़े कानून व्वस्था के लिए प्रसिद्ध है यहां नशीली चीजों का लाना एवं उनका प्रयोग निषेध है। अरबी यहां की प्रधान भाषा है जो हमारे सामने भैंस के आगे बीन बजाने के बराबर थी इंग्लिश के टूटे फूटे शब्दों के सहारे वार्तालाप में आसानी हुई। बाद में एयरपोर्ट की लॉबी में आए और एसिलेटर पर अपने सामान की प्रतीक्षा करने लगे। कुछ समय के बाद अपना सामान लेकर सुरक्षा जांच नियमों का पालन करते हुए बाहर निकल आए।

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कुछ बचे हुए भारतीय रुपयों को सऊदी रियाल (सऊदी मुद्रा)में एक्सचेंज करके अपने पास सुरक्षित रख लिए ताकि समय पर काम आवें। अंततः इन सब व्यथाओं को पार कर अपनी नई उम्मीदों को हकीकत में बदलने के लिए अपनी नई मंज़िल की तरफ निकल पड़े। वास्तव में यह मेरे जीवन की बहुत रोमांचित एवं अनुभव भरी यात्रा थी।

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