क्यों बैठती है लक्ष्मी जी विष्णु भगवन के चरणों में -Lakshmi aur Vishnu Bhagwan ki Kahani

Vishnu and Lakshmi Love Story in Hindi

नमस्कार दोस्तों !

हम आपके समक्ष एक ऐसी भगवान की कहानी लेकर आये है जो पूरी दुनिया को एक बहुत ही अच्छा सन्देश देती है और साथ ही कई लोगों की दुविधा दूर करेगी. कई लोग खासकर युवा पीढ़ी ये प्रश्न पूछते है कि ज़्यादातर तस्वीरो में लक्ष्मी माता को विष्णु भगवान के चरणों में बिठाया ही क्यों दिखाते है. कुछ लोगों को लगता है चूँकि एक प्रेमिका या पत्नी का स्थान तो सर्वपरि और दिल में होना चाहिए तो फिर क्यों ज़्यादातर तस्वीरो में लक्ष्मी माँ को विष्णु भगवन के चरणों की दासी की तरफ प्रदर्शित किया जाता है.

भगवान की कहानी

हम इसका उत्तर अवश्य देंगे और इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए ये विष्णु भगवान की कहानी को अंत तक ज़रूर पढ़े.

भगवान श्री राम का तेज़ और सुंदरता इतनी ज़्यादा थी कि महिलाएं उनकी तरफ आकर्षित हो जाती थी. एक बार माता सीता ने भगवन राम जी को वन में ले जा कर एक पेड़ से बांध दिया क्यूंकि वो अपने राम को किसी दूसरे के साथ बांटना नहीं चाहती थी. ये माता सीता की ईर्ष्या थी लेकिन इसमें सच्चा प्रेम ही था.

एक बार भगवान श्री कृष्ण गोपी का रूप धारण कर राधा के पास आये थे. उस वक़्त राधा का पाँव बहुत पीड़ा कर रहा था और श्री कृष्ण जी ने राधा के पैर खुद दबाये थे और राधा का दुःख दूर किया था. क्या श्री कृष्ण की महिमा इससे कम पड़ गयी, बिलकुल नहीं. ये तो सच्चा प्यार था.

भगवान की कहानी

उसी तरह जब जब पारवती माँ ने काली का रूप धारण कर लिया था तो महादेव को ज़मीन पर लेटना पड़ा और जब काली माँ ने महादेव की छाती पर पर अपना पाँव रखा तब ही वे शांत हुई थी. क्या एक पत्नी का अपने पति के साथ ऐसा व्यव्हार करने से उनमे प्यार कम हो गया, जी नहीं, बिलकुल नहीं. वो तो विधि का विधान था. महादेव ने ये इस सृष्टि को बचाने के लिए किया था और इससे उनके प्यार में कोई फर्क नहीं पड़ा.

उसी तरफ भगवन विष्णु जी की पत्नी का अपने पत्नी के चरणों में बैठना भी सच्चा प्रेम है. ये सिर्फ प्रेम नहीं बल्कि माँ लक्ष्मी का इस सृष्टि के प्राणियों को एक सन्देश भी है.

भगवान की कहानी

वो सन्देश ये है कि अगर मानव अपने भगवन विष्णु को पाना चाहते है तो उसका एकमात्र मार्ग है उनके चरण. अगर कोई भक्त अपने भगवन का प्यार पाना चाहता है तो उसे अपने आप को पूरी तरह विष्णु जी को अर्पित करना पड़ेगा और उसका मार्ग तो केवल भगवन के चरणों से ही शुरू होता है.

इस सृष्टि के सभी प्राणियों को माता लक्ष्मी यही बताना चाहती है कि चाहे जितना भी धन, वैभव और शौर्य कमा लो, अगर तुम्हारे नाथ तुम्हारे साथ नहीं तो सब व्यर्थ है.

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अर्थार्त अपने भगवान् की सेवा अर्चना करने से ही हमें सम्पूर्ण ख़ुशी मिलेगी और इस धरती पर हमारा जीवन सफल होगा.

बोलो लक्ष्मी नारायण की जय !

अगर आपको ये विष्णु भगवान की कहानी अच्छी लगी तो हमें कमेंट में ज़रूर बताये।

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1 Response

  1. radhe meena says:

    nice jankari share ki hai apne. thank you, sir. Jai Shri Krishna

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