बारिश में खिला प्यार – Love Marriage Story in Hindi

Best Love Marriage Story in Hindi

बरसात का मौसम चल रहा था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे। चांदनी रोज की तरह, बस में बैठकर संगीत क्लास में जा रही थी। चांदनी को बचपन से ही संगीत से प्यार था। चांदनी सीतापुर बस स्टैंड पे उतर गई। बस स्टैंड से उसका क्लास १.५ किमी दूर था।वह संगीत के सुरो को गुनगुनाते हुए आगे बढ़ी। अचानक हवा तेज़ होने लगी और कुछ ही देर में तूफान के साथ भारी बारिश शुरू हो गई। चांदनी को बारिश बहुत पसंद थी। उसने अपनी बैग से निकाला हुआ छाता वापस रख दिया और बारिश के मौसम का आनंद उठाने लगी, नाचने लगी।

वहा से आते-जाते कुछ लोगो ने उसका मजाक भी उड़ाया। कुछ लोगों ने कहा, “ अरे ! ये लड़की पागल हो गई है क्या! ये बीच सड़क पर क्या कर रही है, देखो तो जरा! लगता है, इसका दिमाग ठिकाने पे नहीं है!” लेकिन चांदनी को किसी की परवाह नहीं थी। वह बारिश का आनंद उठाने में व्यस्त थी।

Love Marriage Story in Hindi

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 थोड़ी देर बाद, उसी रास्ते से एक युवक पसार हुआ। उसका नाम था, मोहित। मोहित की नजर चांदनी पर पड़ी और मोहित, चांदनी में खो गया। मोहित की आंखे, चांदनी को निहारने में मग्न हो गई। अगले कुछ पलों तक मोहित बस चांदनी को देखता ही रहा और उसका मन ही नही कर रहा था, चांदनी की नजरों से अपनी नजर हटाने का! चांदनी ने भी मोहित को एक-दो बार देखा, फिर वह शर्माके चली गई।

क्लास में देर से पहुंचने की वजह से, चांदनी को उसके शिक्षक ने बहुत डाटा। चांदनी ने चुप-चाप उनकी डाट बरदाश्त की। फिर क्लास खत्म होते ही वह घर चली गई। घर जाने के बाद वह रोज की तरह अपनी छोटी बहन के साथ, मोबाइल में गेम खेलने लगी। चांदनी की उम्र उस समय २४ साल की थी और उसकी बहन उससे ५ साल छोटी थी। दोनों बहुत मस्ती करते थे और खाने के लिए बहुत झगड़ते। एक कहती मम्मी, मुझे दो पहले ! दूसरी कहती, नहीं मम्मी, पहले मुझे चाहिए! मुझे दो। छोटी को मत दो, उसको बाद में देना। फिर उनके पापा आते और कहते, “किसीको नहीं मिलेगा खाना, सबसे पहले मैं खाऊंगा।” फिर पापा दोनों को चुप करा देते और सब साथ में खाना खाते।

खाना खाने के बाद चांदनी अपने कमरे में चली गई। चांदनी की नजरों के सामने, उस युवक की तस्वीर बार – बार सामने आने लगी, जो बारिश में उसको निहार रहा था। वो सारी रात, चांदनी ने उसके ख्यालों में बिताई। दूसरे दिन जब वो संगीत क्लास गई, तो उसको अपनी आंखों पे विश्वास नहीं हुआ! क्योंकि क्लास में, मोहित भी आया हुआ था। बाद में उसे पता चला की मोहित ने आज ही प्रवेश लिया। मोहित शिक्षक की बातों पर कम, चांदनी को निहारने में ज्यादा ध्यान देता। उसकी आंखे बस चांदनी को निहार रही थी और कही पे भी उसका ध्यान नहीं था। चांदनी भी उसको देखकर शर्माती और हसकर अपना चेहरा घुमा लेती।

धीरे-धीरे दोनों के बीच थोड़ी बातचीत हुई; लेकिन अभी तक अपने मन की बात किसीने नही बताई। एक दिन मोहित से रहा नहीं गया, इसलिए उसने रात को, एक प्रेमपत्र लिखा। अगले दिन क्लास में, शिक्षक के जाने के बाद, मोहित ने चांदनी को कहा, “चांदनी, मैंने इसमें तुम्हारे लिए कुछ लिखा है, विनती है की तुम इसे अकेले में पढ़ना।” “ठीक है, मोहित।” कहकर चांदनी ने, उस पत्र का स्वीकार किया।

चांदनी उस पत्र को पढ़ने के लिए उत्सुक थी। वो रात को फटाफट खाना खाकर अपने कमरे में चली गई और उसने पत्र को पढ़ना शुरू किया। “चांदनी, मुझे याद है वो दिन, जिस दिन मैंने पहली बार तुम्हे देखा था। बारिश के सुहावने मौसम ने, मुझे प्यार की अनुभूति कराई। एक पल के लिए भी मेरी आंखे, तुम्हारी नजरों से नहीं हटी। मुझे ऐसा महसूस हुआ की जैसे मानो मुझे मेरी स्वप्न परी के दर्शन हो गए! बारिश की एक-एक बूंद तुम पर ऐसे गिर रही थी, जैसे मानो परीलोक से परियां तुम पर फूल और प्यार बरसा रही हैं! तुम्हारी आंखे इस तरह चमक रही थी, जैसे सितारे चमकते है! तुम्हारा चेहरा चांद से भी प्यारा था! जैसे बारिश में खुशबूदार फूल खिलते है, वैसे ही उस दिन बारिश में, मेरे अंदर भी प्यार का फूल खिल गया। इस बारिश ने, मेरी मुलाकात मेरे प्रेम से करा दी। चांदनी, तुम्हे कोई ऐतराज़ न हो, तो क्या मैं तुम्हे चांद कहकर बुला सकता हूं?

चांदनी, मुझे संगीत पसंद नहीं था, लेकिन फिर भी मैंने संगीत क्लास में प्रवेश लिया; क्योंकि मैं तुमसे मिलना चाहता था और रोज तुम्हे देखने का मन करता था। मैं अपने आपको रोक नहीं सका,इसलिए मैंने संगीत क्लास में प्रवेश लिया। चांदनी, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। क्या तुम मुझसे प्रेम करती हो? क्या तुम मेरे साथ अपना जीवन बिताना चाहोगी?”

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इस प्रेमपत्र को पढ़कर, चांदनी की खुशी एवं उत्साह का ठिकाना नहीं रहा! वह अपने कमरे में गाना लगाकर नाचने लगी। फिर उसने प्रेमपत्र का जवाब लिखा और अगले दिन मोहित को दे दिया। मोहित को बेसब्री से इंतजार था, चांदनी के उत्तर का… मोहित ने उस रात को प्रेमपत्र पढ़ना शुरू किया, “मोहित, बारिश के उस पलों ने, मेरे अंदर भी आपके प्रति प्रेम का फूल खिला दिया। उस दिन आपकी तरह बहुत सारे लोग रास्ते से जा रहे थे, लेकिन सिर्फ आपने मेरी अनुभूति महसूस की और मुझे आनंद के पलों में खोया हुआ पाया। कुछ लोगों ने तो मेरा मजाक भी उड़ाया, लेकिन आपकी सोच लोगों जैसी नहीं है, इतने दिनों में, मैं जान गई की आप सिर्फ दिखने में ही नहीं, मन से भी बहुत अच्छे हो! आपका दिल बहुत सच्चा है। आपने मुझे पाने के लिए, संगीत क्लास में प्रवेश लिया, ये जानते हुए भी की आपको संगीत में जरा भी दिलचस्पी नहीं है। मैं जान गई की आप मेरे लिए कुछ भी कर सकते हो। आपने मेरा मन जीत लिया है, अब में आपकी हूं। मैं आपके प्यार का स्वीकार करती हुं। आपकी चांद ”

इस प्रेमपत्र को पढ़ने के बाद, मोहित को इतनी खुशी हुई कि वो उसे अल्फाजो में बया नहीं कर पाया। अगले दिन जब दोनों क्लास के लिए निकल रहे थे, बारिश शुरू हो गई। चांदनी ने काफी देर इंतजार किया, उसके बाद उसको सीतापुर के लिए बस मिली। वह मन ही मन मोहित से मिलने के लिए तरस गई थी। मोहित भी उसको मिलने के लिए आज घर से जल्दी निकला था और सीतापुर बस स्टैंड के बाहर, अपनी चांद का इंतजार कर रहा था। जैसे ही चांदनी बस से उतरी और बस स्टैंड के बाहर आई, तुरंत उसने मोहित की आवाज सुनी,“ मेरी चांद!” फिर दोनों ने एक दूसरे को गले से लगाया और कुछ पलों के लिए, प्यार की एक अलग ही अनुभूति में दोनों खो गए! जहा सिर्फ चांद थी और मोहित। फिर दोनों ने एक दूसरे के साथ, हमेशा साथ निभाने की कसमें खाई।

उसके बाद चांदनी और मोहित रोज एक दूसरे से मिलते, घंटो तक बाते करते और प्यारभरे पल बिताते। दोनों ने अपने-अपने घर पे भी प्रेम की बात बता दी। चांद और मोहित दोनों के परिवार, इस रिश्ते के लिए मान गए। अगले २ सालो के बाद, दोनों ने एक दूसरे से विवाह किया और विवाह के खुबसूरत बंधन में हमेशा के लिए बंध गए।

( सूचना – यह कहानी काल्पनिक है। इस कहानी में दिए गए सारे पात्र और जगह भी काल्पनिक है। किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा उद्देश नहीं है। )

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