अत्याचारी बेटा (अंतिम भाग) Emotional Story in Hindi

( सूचना – दोस्तो, अगर अपने भाग – १ नही पढ़ा है, तो इस link के जरिए पढ़ सकते हो या फिर इस ब्लॉग पे देख सकते हो पहले का भाग )

Heart Touching Emotional Story about Parents in Hindi

रास्ते में दोनों को एक युवक मिला। जिसका नाम था, राजेश। राजेश बचपन से ही अनाथ था। उसके माता – पिता को उसने एक अकस्मात में खो दिए थे। राजेश ने दोनों को ऐसे बेबस देखकर पूछा, “ क्या हुआ ? आप कहा जा रहे हो? आप इतने घबराए हुए क्यों हो?” “ बेटा क्या बताऊं तुम्हें, मेरा एक बेटा था, उसने हम दोनों को घर से बाहर निकाल दिया और हमारी सारी जमीन बेच दी, अभी हमारा बेटा उसकी पत्नी के साथ, उस घर में ऐश कर रहा है। हम दोनों को उसने धक्के मारकर घर से बाहर निकाल दिया।” ये सब कहते हुए, हनुमानप्रसाद ने अपनी सारी कहानी बता दी…

फिर राजेश, दोनों को अपने घर ले गया। घर पे सिर्फ राजेश और उसकी बहन कोमल रहती थी। राजेश ने सारी बातें कोमल को बताई, की दोनों उनको कैसे मिले? और उनके साथ क्या हुआ था ? राजेश और कोमल दोनों, अपने माता-पिता की तरह ही उन दोनों की सेवा करने लगे। कोमल एक से बढ़कर एक पकवान बनाकर दोनों को खिलाती और राजेश दोनों को बाग-बगीचे में सैर करने ले जाता, मंदिर ले जाता, उनकी हर तरह से देखभाल करता। इन दोनो की यह सेवा देखकर एक दिन हनुमानप्रसाद ने कहा,“ बेटा राजेश और कोमल, तुम दोनों हमारे लिए फरिश्ते बनकर आए हो। जो हमारा अपना बेटा था, उसने तो हमे बेघर कर दिया, लेकिन तुम तो मेरे बेटे नहीं थे, उसके बावजूद तुमने हमें अपनाया। हमें सहारा दिया, हमारी इतनी सेवा की। इतनी सेवा और आदर्श कर्म तो मेरे अपने बेटे ने भी मेरे लिए नही किया। बच्चो, तुम दोनो ही मेरे सच्ची दौलत है। आज से अपने आपको कभी भी अकेला मत समझना। हम दोनों तुम्हारे माता-पिता है। हम दोनों के होते हुए, तुम कभी अनाथ नहीं हो सकते।”ऐसा कहकर हनुमानप्रसाद और कौशल्या ने, दोनों को गले से लगा लिया।

कुछ सालो के बाद, सुशील की पत्नी सविता ने, एक बच्चे को जन्म दिया। उसका नाम रखा, विशाल। दोनों ने बड़े लाड-प्यार से उसका पालन किया। धीरे-धीरे वह बड़ा हुआ। उसकी हर एक इच्छा दोनों ने पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए, लोकप्रिय विद्यालय में भेजा। अब वह २२ साल का हो चुका था। बचपन से लेकर अब तक, मां-बाप को ड्रग्स, शराब और सिगरेट के नशे में देखकर, उसको भी इन सबकी लत लग गई। सुशील और सविता उसको कुछ बोलते नहीं और उसको ऊपर से यह सब करने ले लिए बढ़ावा देते, “ अभी तो तुम जवान हो, जी लो जिंदगी। ऐश करो। पढ़ाई-लिखाई तो होती रहेगी! ” ऐसा सब कहकर उसको बढ़ावा देते।

कुछ दिनों के बाद, अचानक एक दिन विशाल ने वही किया, जो सालो पहले सुशील ने किया था। वह आधी रात को अपने दो दोस्तों के साथ घर पहुंचा। सुशील और सविता दोनों को जगाया और कहा “ कहा है बुड्ढे और बुढ़िया। मेरे घर से बाहर निकलो। आज से ये घर मेरा। इस घर में, मे और मेरे ये दोस्त रहेंगे। चलो घर खाली करो। इस लिफापे पे अपने हस्ताक्षर कर दो, दोनों जल्दी। दोनों ने हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया। फिर विशाल ने दोनों का हाथ पकड़कर, जबरदस्ती हस्ताक्षर ले लिए, जिस में लिखा था, की आज से यह घर और जमीन सब विशाल का है। सुशील और सविता का इसमें कोई भाग नहीं है। फिर विशाल और उसके दोस्तों ने, सुशील और सविता को धक्के मारकर और लकड़ी से पीटकर घर से बाहर निकाल दिया। दोनों की आंखो से अश्रु बहने लगा और दोनों को दिल से पछतावा हुआ की, आज उनके बेटे ने भी वही किया, जो सालो पहले मैंने किया था। जिस पीड़ा की अनुभूति, सुशील के माता-पिता को सालो पहले हुई थी, उन्हीं के समान पीड़ा की अनुभूति आज सुशील को हुई।

दोनों खुदा से माफी मांगते हुए, उस गांव को छोड़कर, धीरे-धीरे आगे बढ़े। कुछ घंटे चलने के बाद अचानक, सुशील को दिल का दौरा पड़ा और राजेश के घर के बाहर उसने अपना दम तोड दिया। सविता ने आसपास के लोगों को आवाज लगाई, की कोई सुशील को बचा ले। उसकी आवाज सुनकर, राजेश अपने घर के सभी सदस्य के साथ बाहर आ गया। आसपास के कुछ लोग भी वहा पे इकट्ठा हो गए, उनमें से एक नर्स थी। उसने फौरन हाथ की जांच करके पता लगा लिया, की सुशील मर चुके है।

राजेश ने हनुमानप्रसाद और कौशल्या को कहा, “ देख लिया आपने। खुदा ने उसके कर्मो की सजा, उसको दे दी। जैसी करनी, वैसी भरनी।”

समाप्त।

( सीख – दोस्तों, इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है, की हमें कभी भी अपने माता-पिता के साथ इस प्रकार का अत्याचार नहीं करना हैं। हमें उनका आदर और उनका सम्मान करना हैं, उनकी सेवा करनी हैं, उनका ध्यान रखना हैं। अगर हम अपने माता-पिता के साथ अत्याचार करेंगे, तो हमारी आनेवाली पीढ़ी भी हमारे साथ वही बर्ताव करेगी। )

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