Poem on Grandfather in Hindi – दादा जी पर कविता

Poem on Grandfather in Hindi

Friends, poem on grandfather in Hindi likhne ka mera maksad sirf ye batana hai ki zindagi ki bhag daud me hum apne dada dadi par zyada dhyan nahi dete lekin aapko bata du ki aapke dada dadi aapko apne mata pita se bhi zyada pyar karte hai. Dada aur pote ya poti ka rishta bilkul dosti ki tarah hota hai. Aise rishtey ko hamesha sambhal kar rakhe.

 

दोपहर का समय था, ऑफिस में बैठा काम में उलझा था

दादा जी का फ़ोन आया, प्यार से पुछा…. खाना खाया था?

चिड़चिड़ेपन में बोल दिया खा लिया दादा जी, बाद में करूँगा अभी थोड़ा बिजी हू

दादा बोले अच्छा रखता हू बेटा, काम की टेंशन मत लिया करो ज़्यादा

गलती से फ़ोन काटना भूल गए थे दादा जी

अभी अभी तो मोबाइल चलाना सीखे थे दादा जी

पीछे से आवाज़ आयी, गायत्री पोते ने तो खा लिया खाना

अब ज़रा बेटे से पूछू खाया कि नहीं

दादी बोली तुम तो खा लो पहले

दादा बोले बेटे से पूछ लू पहले

पीछे से जब ये सब सुना मैंने

पूछो ना खुद को कितना कोसा मैंने

इस भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में कौन किसी के बारे में सोचता है

आज का इंसान तो हर समय दूसरे को गिराने की सोचता है

किस्मत से मिलते है ऐसे प्यार करने वाले

जो मिले है तो सभाल कर रखो यारो ऐसे रिश्ते नाते

 

—— Vishal Kashyap

 

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