चोर का समर्पण (रहस्यमय प्रेम कथा – 4) Amazing and Different Love Story Hindi

चोर का समर्पण – अंतिम भाग (Amazing Love Story in Hindi)

तन्वी को पानी में डूबते हुए देखकर,बिल्ला फ़ौरन नदी में कूद गया। बिल्ला ने ४- ५ मिनिट तक ढूंढा,लेकिन तन्वी उसे देख ही नहीं रही थी। थोड़ी देर में उसको तन्वी दिखाई दी। बिल्ला ने तन्वी को बाहर निकाला और होश में लाने के लिए कोशिश करने लगा। बिल्ला ने आधा पानी तो उसके शरीर से बाहर निकाल दिया, लेकिन अभी भी उसके शरीर में काफी पानी था। बिल्ला ने जरा सा भी विलंब किए बिना, तुरंत एक गाड़ी करके अस्पताल ले गया। अस्पताल जाकर उसने फौरन उसका इलाज शुरू करवाया।

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बिल्ला ने जरूरी फीस भी चुकाई, जो डॉक्टर ने उससे मांगी थी। कुछ देर तक उसको होश न आने पर डॉक्टर ने कहा, “ हमने बहुत कोशिश की, लेकिन तन्वी को होश ही नहीं आ रहा, लगता है अब फाइनल ऑपरेशन ही करना पड़ेगा, आप ईश्वर से तब तक प्रार्थना कीजिए।” फिर डॉक्टर, तन्वी को ऑपरेशन थियेटर में ले गए।

बिल्ला ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था, “ है ईश्वर ! तन्वी को बचा लेना। उसको कुछ भी मत होने देना। अगर उसको कुछ हुआ, तो उसका जिम्मेदार मैं रहूंगा। मैं नहीं चाहता की मेरे गुनाहों की सजा उसको मिले। है ईश्वर! तन्वी बहुत साफ दिल की लड़की है। मैं नहीं चाहता की ऐसे नेक मन की लड़की के साथ कुछ हो! इसके लिए आपसे यही प्रार्थना है की आप उनकी जान बचा लो।”

बिल्ला ने १ घंटे तक ईश्वर से प्रार्थना की। १ घंटे के बाद, डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर से बाहर आए। डॉक्टर को देख तुरंत बिल्ला ने उनको पूछा, “ डॉक्टर साहब, अब तन्वी कैसी है? वो ठीक तो है ना?” “ हां, आप बिल्कुल भी घबराईए मत, वो ठीक है। अच्छा हुआ आप उसे फौरन मेरे पास ले आए, अगर १ मिनिट भी देरी हो जाती लाने में, तो शायद आज हम उनको नहीं बचा पाते। आपने समय पर उनको यहां पहुंचा दिया, इसलिए हम उन्हें बचा पाए।” डॉक्टर ने उत्तर दिया। यह बात सुनकर बिल्ला बहुत खुश हुआ और उसने डॉक्टर को दिल से धन्यवाद किया, फिर वहां से चला गया।

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थोड़ी देर में तन्वी को होश आया और उसने कहा, “ मैं कहा पर हूं? मैं अस्पताल में कैसे? मैं तो पानी में थी ना?” फिर डॉक्टर ने उसको सारी बात बताई की कैसे बिल्लाने आकर उसकी जान बचाई। डॉक्टर को बिल्ला का नाम नहीं पता था ,इसलिए उन्होंने सिर्फ इतना कहा की “एक सज्जन आपको यहां लेकर आया था। उसने आपके लिए ईश्वर से १ घंटे तक दुआ भी की। फिर आपको जब होश आने ही वाला था, इतनी देर में वो चले गए। सच कहूं तो वो इंसान आपके लिए खुदा का ही एक फरिश्ता है। अगर वो एक भी मिनिट विलंब करते, तो आपकी जान आज नहीं बचती। उन्होंने समय पर आपको यहां लाकर आपकी जान बचाई हैं। ” बिल्ला अपने हाथ में एक कड़ा पहनता था, जिसका रंग सुनहरा था। तन्वी को यह बात पता थी। तन्वी ने डॉक्टर से पूछा, “ क्या उन्होंने अपने हाथ पे कोई कड़ा पहना हुआ था?” “ देखो मुझे इतना ध्यान से तो याद नहीं, लेकिन हां, मैडम। सुनहरे रंग का कड़ा उनके हाथों पे मैंने देखा था।” यह बात सुनकर तन्वी समझकर गई की वो बिल्ला ही था।

बिल्ला, तन्वी की जान बचाने के बाद जंगल की ओर निकल पड़ा। कुछ देर बाद, जब बिल्ला अपने घर पहुंचा, तो उसके होश उड़ गए। बिल्ला का एक आदमी दौड़ता हुआ उनके पास आया और कहने लगा, “ सरदार, आपके जाने के बाद, कुछ डाकू यहां पे आए थे। हमने अपना जीजान लगा दिया, अपने धन की रक्षा के लिए, लेकिन फिर भी एक बोरी जितना सोना लेकर वो चले गए, हम उसे पकड़ नहीं पाए।” “ मूर्ख हो तुम सब। वो हमारा १ बोरी सोना लेकर भाग गए और तुम सब कुछ नहीं कर पाए। क्या तुम सब इतने कमजोर हो गए की उनका सामना भी नहीं कर पाए। जानते हो ना एक – एक सोना चोरी करने में हमने कितनी मेहनत की थी। अगर तुम सब इन धन – संपत्ति की रक्षा नहीं कर सकते, तो यहां से चले जाओ, मुझे कोई जरूरत नहीं है।” कहकर बिल्ला ने २-४ आदमियों को थप्पड़ मारा और बिल्ला गुफा के बाहर एक पेड़ के नीचे बैठ गया।

कुछ देर तक बिल्ला पेड़ के नीचे शांत बैठा रहा। कुछ देर बाद, उसके मन में अचानक तन्वी की सारी बाते याद आई और बिल्ला मन ही मन सोचने लगा,“ ये सोना तो मेरा नहीं हैं। मैंने तो केवल उसको चुराया है, फिर भी मुझे इतना गुस्सा आ रहा है, इतना दुःख हो रहा है, तो ये सोना वास्तव में जिसका है; उसको कितना दुःख हुआ होगा! क्योंकि उसने तो उस सोने को पाने के लिए कितनी मेहनत की होगी, अपना दिन -रात एक किया होगा, खून – पसीना बहाया होगा, तब जाकर इस सोने को हासिल कर पाया। सिर्फ यही नहीं, मैंने जिसका धन, हीरे, गहने,आदि चुराया था, उन्होंने भी कितनी मेहनत से यह सब कमाया होगा। बिल्ला मन ही मन पछताने लगा कि उसने सबके साथ बहुत गलत किया। बिल्ला की आंखो से दुःख के आंसू बरसने लगे। उसने निश्चय किया की अब इस चोरी – डकैती के रास्ते का त्याग करके, सही रास्ते पर चलेगा। बिल्ला ने सोच लिया, अब वह चोरी – डकैती से हासिल किया हुआ धन, समर्पित कर देगा और एक ईमानदार इंसान बनकर सारी जिंदगी रहेगा।

बिल्ला अगली सुबह ही सारी धन – संपत्ति लेकर जिले के मुख्य पुलिस स्टेशन गया और उसने देखा तो सामने एक पुलिस अफसर उसकी ही फाइल देख रहा था, चोरी – डकैती की। वह पुलिस अफसर ईमानदार और अपने काम के लिए वफादार था। पहले वह अफसर दूसरे जिले में काम करता था, लेकिन उसकी बदली आज से इसी जिले में हो गई थी, इसलिए वह इस जिले में आ गया। इस जिले में उसकी ड्यूटी का आज पहला दिन था। बिल्ला ने पुलिस अफसर के सामने सब सच बता दिया और अपना गुनाह कबूल कर लिया। बिल्ला ने उन पुलिस अफसर के नाम भी बता दिए, जिसको वह रिश्वत देता था। साथ ही बिल्ला ने अपने साथी मित्रो के नाम भी बता दिए, जो चोरी में उसके साथ थे। बिल्ला ने अब सच्चाई और अच्छाई का मार्ग अपना लिया। ईमानदार पुलिस अफसर ने बिल्ला के साथ – साथ, भ्रष्ट पुलिस अफसर और बिल्ला के साथी मित्रो को भी सजा दिलवाई। बिल्ला ने अपना गुनाह कबूल करके सही रास्ते पर चलने का जो निश्चय किया था, उस वजह से पुलिस अफसर ने उसकी सजा भी थोड़ी कम कर दी। बिल्ला के जेल जाने के बाद, ईमानदार पुलिस अफसर ने, सारी धन – संपत्ति जन कल्याण के लिए उपयोग में ली। उन्होंने पुरानी फाइल खोलकर, जिन लोगों के घर से चोरी हुई थी, उनको बुलाकर पैसे वापस दे दिए। उनसे जितना हो सकता था, उतने लोगों का उन्होंने संपर्क किया और जिनका संपर्क नहीं हो पाया और जो बाकी का धन बचा था, वह उन्होंने जन कल्याण के लिए दे दिया, जिससे गरीब बच्चों को भोजन मिला, शिक्षा मिली और जरूरतमंद लोगों को रोटी – अनाज का सहारा मिला। बिल्ला के जेल जाने के बाद, तन्वी को पता चला की बिल्ला जेल में है और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया, तो मन ही मन उसको बिल्ला के लिए बहुत गर्व हुआ। वह बिल्ला के रिहा होने की प्रतीक्षा करने लगी और उसकी यादों में वह रोज आंसू बहाती।

कुछ सालो बाद बिल्ला जेल से रिहा हुआ। बिल्ला ने तय किया की वह मेहनत करेगा और ईमानदारी की रोटी खायेगा। बिल्ला ने एक सीमेंट की फैक्टरी में मजदूर बनकर काम किया। बिल्ला रोज मेहनत करता और रात को खुद रोटी – सब्जी बनाकर खाता। जब तन्वी को यह बात पता चली, तो तन्वी की आंखो में आंसू आ गए। उससे नहीं रहा गया, बिल्ला से मिले बगैर। अगले दिन ही तन्वी दौड़ी चली आई, जहां पे बिल्ला काम करता था। तन्वी ने बिल्ला को गले से लगाया और प्यार से उसके सिर को चूमा। फिर कुछ पलों तक दोनों बहुत रोए और एक दुसरे के आंसू पोछे। बिल्ला ने कहा, “ तन्वी, तुम सच कहती थी, ईमानदारी की कमाई, बेईमानी की कमाई से बहुत बड़ी है। आज मुझे किसी का डर नहीं है, मैं चैन की नींद सोता हूं। मैं आज चोर से एक अच्छा इंसान बन गया हूं, इसकी वजह सिर्फ तुम हो। तुम्हारे सच्चे प्यार ने मेरा मन जीत लिया। क्या अब मैं तुमसे विवाह कर सकता हूं?”

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  “ हां मेरे परमेश्वर। आपको तो मैंने उसी दिन से अपना वर चुन लिया था, जिस वक्त आपने मेरी जान बचाई थी, जब हम पहली बार मिले थे। मैंने हर एक पल केवल आपका स्मरण किया है। मेरा दिल सिर्फ आपके लिए धड़कता है और किसी के लिए नहीं। कितने साल बीत गए, मेरे लिए कई रिश्ते आए, लेकिन मैंने किसी से विवाह नहीं किया। आप मेरे दिल का वो प्रकाश हो, जिसे मेरे दिल से खुदा भी बुझा नहीं सकता। मैं आपसे विवाह करूंगी और हम बहुत अच्छे से जीवन के हर एक पल व्यतीत करेंगे।” तन्वी ने उत्तर दिया।

कुछ दिनों बाद, तन्वी और बिल्ला एक दूसरे से विवाह कर लेते है और विवाहित बंधन में बंध जाते है। जीवनभर दोनों एक दूसरे का साथ निभाते है और खूबसूरत जीवन व्यतीत करते हैं।

समाप्त।

( सूचना – यह कहानी काल्पनिक है। इस कहानी में दिए गए सारे पात्र,सारी बातें और जगह भी काल्पनिक है। किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा उद्देश नहीं है। )

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4 Responses

  1. Dipak says:

    Bahut hi hard story he big brother

  2. Rajendra says:

    Amazing story aashu badiya

  3. Gauri Rajput says:

    story ke sare parta bhute acche the air kiya story koi pade unka dil kush ho jaye sir wow sir she is brillint love story

  4. Sunil kumar says:

    Nice

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