एक फौजी की बेटी होना कैसा अनुभव है, सुनिए अर्शदीप कौर की ज़ुबानी।

मैं राजस्थान से हूँ और मेरे पिता आर्मी में मेजर है. मेरे परिवार में ज़्यादातर लोग आर्मी में है और थे. मेरे दादा जी, पिता जी और अब मेरा भाई भी आर्मी में है. मैं मेडिसिन की पढाई कर रही हूँ और पढाई पूरी करने के बाद किसी आर्मी हॉस्पिटल में ज़रूर अप्लाई करुँगी. मुझे फ़ौज और फौजियों पर गर्व है, इसलिए नहीं कि मेरे परिवार में सभी फ़ौज में है बल्कि इसलिए क्यूंकि मुझे पता है किन मुश्किलों में फौजी रहते है और कितनी मेहनत से वो मुकाम हासिल करते है.

मेरे फ्रेंड सर्किल में अक्सर मुझे सवाल किया जाता है कि आर्मी परिवार से होना तुम्हे कैसे लगता है. शायद यही सवाल कई भारत के देशवासियों के मन भी होगा और इसीलिए मैंने ये पोस्ट लिखने का फैसला किया.

Fauji ki kahani

आर्मी परिवार में होने की वजह से कुछ नियम और अनुशासन की हमें पालना करनी पड़ती है. एक आर्मी अफसर की बेटी होने का मतलब है कि हर चीज़ का एक समय होता है. हर चीज़ अपने आधारित समय पर होती है, फिर वो चाहे खाना हो, उठना हो, सोना हो या फिर पढ़ना हो.

आर्मी परिवार में लड़कियों को भाईयो या लड़को के समान ही रखा जाता है. मैं ख़ुश्किमत हूँ कि मेरा जन्म आर्मी परिवार में हुआ, मुझे कभी ये एहसास नहीं दिलाया गया कि तुम एक लड़की हो. अगर हम भाई बहन में कभी लड़ाई झगड़ा हो भी जाए तो माँ बाप कभी हस्तक्षेप नहीं करते. वे हमेशा यही कहते है कि अपनी लड़ाई, अपना मामला खुद सुलझाओ.

आर्मी परिवार में होने की वजह से हमें बहुत कुछ नया सीखने को मिलता है. अनुशासन और अपनी समस्याओ से खुद लड़ने की प्रवत्ति हम में कूट कूट कर भरी होती है. चूँकि मेरे पिता की कई जगह पोस्टिंग हो चुकी है, मैं किसी भी तरह के वातावरण में और किसी के भी साथ बड़ी आसानी से घुल मिल जाती हूँ. जब कि आम परिवार के बच्चो को किसी नए वातावरण में adjust होने मे काफी दिक्कत होती है.

मेरे पिता जी ने शुरू से मुझे TV या फिल्म देखने को मना करते है. वे हमेशा मुझे कहते है कि घर में tv देखने से अच्छा है बाहर जाओ कुछ सीखो. मैं 18 साल की उम्र में बाइक पर लेह लद्दाख घूम चुकी हूँ और मेरे घरवालों ने मुझे कभी मना नहीं किया. जबकि आम परिवार के बच्चो को, खासकर लड़कियों को माँ बाप ऐसे ट्रिप पर कभी नहीं भेजते.

Fauji ki kahani

मुझे बचपन से ही आर्मी के तौर तरीको की बहुत अच्छे से जानकारी हो गयी थी क्यूंकि मैं एक आर्मी परिवार से हूँ और आर्मी स्कूल में पढ़ी हूँ.

मैं जब भी किसी मुठभेड़ या आर्मी पर हुए हादसे के बारे में सुनती हो तो तनाव होता है. ऐसे में सबसे पहले मैं अपने पिता को फ़ोन करके उनकी खैरियत पूछती हूँ. मेरे पिता ही नहीं बल्कि कई रिश्तेदार भी सेना में है, और जब भी किसी आर्मी पर हुए हमले की खबर सुनती हूँ तो tension हो जाती है.

आर्मी परिवार में होने की वजह से मेरे अंदर भी आर्मी ज्वाइन करने की इच्छा है और शायद एक दिन मैंने भी देश की सेवा करू. देशभक्ति मेरे अंदर और ज़्यादातर आर्मी परिवार के बच्चो में कूट कूट कर भरी होती है.

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