मेरी भाभी को भी मुझ जैसा प्यार दे न माँ ! (Best Poem in Hindi)

समय के साथ अपने को भी बदल ले न माँ, मेरी भाभी को भी मुझ जैसा प्यार दे न माँ ।

रोना तो छोड़, हँसने के लिए भी कोना ढूंढती हैं वो, घर के हरेक कोने को, हँसी का कोना बना दे न माँ ।

 

बाज़ार से मुझे न बताकर मेरी मन पसंद की चीज़ें ला देती है तू, कितना अच्छा लग रहा है बोलकर, कुछ उनके हाथ में भी थमा दे न माँ ।

कौन है यहाँ उनका ? बाद में बना एक रिश्ता ही तो है, तेरी ही गोद में लोटपोट होने वाला वातावरण बना दे न माँ।

 

छोटी मोटी गलतियों को नज़रअंदाज कर दे उनकी, बड़ी गलतियों को भी हँसते हँसते सुधारना सीखा दे न माँ ।

मीठी बातों से थकान मिट जाती है कहती थी तू कभी, यही सोचकर, मुस्कराते हुए दो मीठे बोल, बोल दे न माँ ।

 

क्यों उठ गई ? तबियत ठीक नहीं है, आराम कर बोलती थी न तू मुझको,

कैसे नहीं समझेगी तेरा मर्म, गर्म पानी देते हुए उसके माथे पर भी एक बार प्यार से सहला दे न माँ ।

 

वो भी बेटी है किसी की, जो आज बहू है तेरी प्यार से इतनी सी बात स्वीकार ले न माँ,

समय के साथ अपने को भी बदल ले न माँ, मेरी भाभी को भी मुझ जैसा प्यार दे न माँ ।

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