“कल शायद अच्छा ईनाम मिलेगा” बीरबल की एक मजेदार कहानी

दोस्तों आज मैं आपके लिए प्रसिद्ध birbal ki kahani बता रहा हूँ। आपने पहले भी akbar birbal ki kahani सुनी होगी। इनकी कहानिया हमें प्रेरणा देती हैं। तो चलिए जाने birbal की एक मजेदार story..

Birbal Story in Hindi

एक दिन की बात हैं, एक गरीब कवि एक धनी आदमी से मिलने गया और उस कवी ने उसे कई सुंदर कविताएं इस उम्मीद के साथ सुनाईं कि शायद वह अमीर खुश होकर कुछ ईनाम जरूर देगा। लेकिन वह धनवान भी महाकंजूस था, बोला, “तुम्हारी कविताएं सुनकर दिल खुश हो गया। एक काम करो, तुम कल फिर आना, मैं तुम्हें खुश कर दूंगा।”

कवी ने सोचा ‘कल शायद अच्छा ईनाम मिलेगा।’ ये सोचकर कवि घर पहुंचा और सो गया। अगले दिन वह फिर उस धनवान की महल में जा पहुंचा। वह धनवान बोला, “सुनो कवि महाशय, जैसे तुमने मुझे अपनी कविताएं सुनाकर खुश किया था, उसी तरह मैं भी तुमको बुलाकर खुश हूं। तुमने मुझे कल कुछ भी नहीं दिया, इसलिए मैं भी कुछ नहीं दे रहा, हिसाब बराबर हो गया।”

यह बात सुनकर कवि बहुत दुखी हो गया। उसने अपनी सारी बात एक मित्र को सुनाई और वह मित्र बीरबल का भी मित्र था उसने ये सारी बातें बीरबल को बता दिया। यह सुनकर बीरबल बोला, “अब जैसा मैं कहता हूं, वैसा करो। तुम उस धनवान से मित्रता करके उसे खाने पर अपने घर बुलाओ। हां, अपने कवि मित्र को भी बुलाना मत भूलना। मैं तो खैर वहां मैंजूद रहूंगा ही।”

Birbal Story in Hindi

akbar birbal ke kisse

बीरबल की बताई योजनानुसार कवि के मित्र के घर दोपहर को भोज का कार्यक्रम तय हो गया। निमंत्रण मिलने पर वह धनवान भी आ पहुंचा। उस समय बीरबल, कवि और कुछ अन्य मित्र बातचीत में मशगूल थे। समय गुजरता जा रहा था लेकिन खाने-पीने का कहीं कोई नामोनिशान न था। वे लोग पहले की तरह बातचीत में व्यस्त थे। धनवान की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, जब उससे रहा न गया तो बोल ही पड़ा, “भोजन का समय तो कब का हो चुका ? क्या हम यहां खाने पर नहीं आए हैं ?”
“खाना, कैसा खाना ?” बीरबल ने पूछा।
धनवान को अब गुस्सा आ गया, “क्या मतलब है तुम्हारा ? क्या तुमने मुझे यहां खाने पर नहीं बुलाया है ?”
बीरबल ने जवाब दिया “खाने का कोई निमंत्रण नहीं था। यह तो आपको खुश करने के लिए खाने पर आने को कहा गया था।”  धनवान का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, क्रोधित स्वर में बोला, “यह सब क्या है? इस तरह किसी इज्जतदार आदमी को बेइज्जत करना ठीक है क्या ? तुमने मुझसे धोखा किया है।”
अब बीरबल हंसता हुआ बोला, “यदि मैं कहूं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं तो…। तुमने इस कवि से यही कहकर धोखा किया था ना कि कल आना, सो मैंने भी कुछ ऐसा ही किया। तुम जैसे लोगों के साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए।”
धनवान को अब अपनी गलती का आभास हुआ और उसने कवि को अच्छा ईनाम देकर वहां से विदा ली।
वहां मौजूद सभी लोगो ने बीरबल को प्रशंसा भरी नजरों से देखने लगे।
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तो, दोस्तों birbal story in hindi से आपने क्या सीखा हमें जरूर बताये, और आपके पास भी akbar birbal ki kahaniyan हैं तो हमें भेजे, जाली पब्लिश किया जायेगा।

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