माता पिता का आज्ञाकारी Good Son Story in Hindi with Moral

Good Son Story in Hindi with Moral

आलम अपने माता पिता के साथ रहता था,आलम के माता पिता बहुत ही नर्मदिल और अच्छे स्वभाव वाले व्यक्ति थे। उन्होंने आलम को बहुत प्रेम से पाला-पोसा, आलम भी अपने माता पिता से बहुत प्रेम करता था। आलम के माता पिता बेहद गरीब थे, लेकिन उन्होंने आलम को अच्छी शिक्षा हासिल करवाने के लिए बहुत ही मेहनत की। आलम भी पढ़ाई में बहुत होशियार था। उसने अपनी लगन और ईमानदारी से एक अच्छी नौकरी पा लिया ,जाहिर सी बात है कि एक अच्छी नौकरी मिलने के बाद उसने एक खूबसूरत घर बनवाया। वो अलग बात है कि हर शख्स एक जैसा नहीं होता। हर किसी को अपने माता पिता से मोहब्बत नहीं होता।

Good Son Story in Hindi with Moral

Good Son Story in Hindi with Moral

आलम ने नौकरी मिलने के बाद अपने माता पिता को वहां रहने के लिए बुला लिया। आलम अपने माता पिता की हर तरह से ख्याल रखता था। वह उन्हें कभी भी किसी चीज की कमी नहीं होने देता था। अचानक आलम की नौकरी दूसरे इलाके में ट्रांसफर हो गया। उसे एक दूसरे शहर में जाना पड़ा। आलम अपने माता पिता को साथ ले जाना चाहता था, लेकिन उसके माता पिता ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपना घर और गांव नहीं छोड़ना चाहते हैं। आलम अपने माता पिता को छोड़कर जाना तो नहीं चाहता था, लेकिन नौकरी आखिर नौकरी होता है। जहाँ लग गया जाना ही पड़ेगा। आख़िर आलम चला ही गया लेकिन उन्हें याद करता रहता था। महीने में जब भी छुट्टी मिलता वो उन्हें देखने के लिए शहर से गांव चला आता था।

एक दिन अचानक फोन आया कि उसके माता पिता बहुत बीमार हैं। आलम ने तुरंत गांव का रुख किया और गांव जा पहुँचा, इस तक़लीफों की घड़ी में आलम ने अपने माता पिता की बहुत देखभाल की। वह उन्हें डॉक्टर के पास ले गया और उनका इलाज अच्छे से करवाया। आलम माता पिता की देखभाल करने से बहुत खुश हुआ। और उसने महसूस किया कि माता पिता का देखभाल करना हमारे सभी दर्जे की जिम्मेदारियों में से एक है। आलम ने ईश्वर (अल्लाह) को बहुत शुक्रिया अदा किया। और अपने माता पिता से वादा किया कि वह हमेशा उनके साथ रहेगा और उनका खयाल रखेगा।

(इस कहानी से हमें यह सीख मिलता है कि माता पिता हमारे लिए सब कुछ हैं, क्योंकि अल्लाह इरशाद फरमाता है कि वालिदा(माता )के क़दमों के नीचे जन्नत है और वालिद (पिता)उस जन्नत के दरवाजे की कुंजी है। इसलिए हमें हमेशा उनका फर्माबरदार (आज्ञाकारी) बनकर रहना चाहिए।)

मोहम्मद रब्बानी  
निवास स्थान (पता): इंदौली, पोस्ट – अमारी बाजार जिला – बस्ती
बी. ए. हिंदी साहित्य
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी , अलीगढ़ उत्तरप्रदेश,
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