पिता की डांट और सिखाई आदतें कभी व्यर्थ नहीं जाती - Father Son Story in Hindi

पिता की डांट और सिखाई आदतें कभी व्यर्थ नहीं जाती – Father Son Story in Hindi

Father Son Story in Hindi Submitted by Anurag Mahapatra

माँ हमेशा अपने बच्चो के सबसे नज़दीक होती है क्यूंकि वो अपने बच्चो की हर बात मानती है और उन पर कभी हाथ नहीं उठा सकती लेकिन एक बाप को सख्त रवईया अपनाना पड़ता है ताकि वो अपने बच्चो को दुनियादारी और ज़िन्दगी की असल सच्चाई से रूबरू करवा सके. ऐसे में बाप कई बार अपने बच्चो के साथ सख्ती से पेश भी आते है लेकिन बच्चो को इसका कभी बुरा नहीं मानना चाहिए क्यूंकि हर बाप अपने बच्चे का हमेशा भला ही चाहता है. अगर वो आज आपको डांटते है तो वो सिर्फ इसलिए ताकि आप ज़िन्दगी में अच्छी आदतें अपनाएं ताकि भविष्य में आपको कभी तकलीफ ना हो.

पिता और बेटे की एक ऐसी ही कहानी हम लेकर आये है जो यकीनन आपको अच्छी लगेगी.

नितिन एक मिडिल क्लास फॅमिली से था. वह परिवार का अकेला बेटा था इसलिए उसे बचपन से ही अपने माँ बाप का खूब प्यार मिला था. वो जिस चीज़ पर भी ऊँगली करता उसे वो चीज़ मिल जाती और शायद इस वजह से उसकी आदतें थोड़ा खराब हो रही थी, वो ज़िद्दी हो गया था, बात बात पर रूठ जाता था.

जब नितिन 12 वीं क्लास में हुआ तो वो काफी चिड़चिड़ा हो गया था, माँ बाप की कोई बात नहीं मानता था और नितिन के पिता को इस चीज़ का एहसास हो चूका था.

Father Son Story in Hindi

नितिन के पिता उसमे अनुशासन लाना चाहते थे और उन्होंने पूरी कोशिश भी की. नितिन जब भी अपने कमरे में खाली बैठता तो कमरे की सारी lights जलती रहती। नितिन के पिता हमेशा उसे टोक देते थे कि अगर कमरे में बैठे हो तो सिर्फ वही लाइट इस्तेमाल करो जिसकी ज़रूरत है. सुबह ब्रश करते वक़्त नितिन नल खुला छोड़ देता था जो कि नितिन के पिता को बिलकुल अच्छा नहीं लगता था. नितिन के पिता ने उसे बहुत समझाया कि ब्रश करते वक़्त नल खुला मत छोड़ा करो, इससे बहुत सारा पानी व्यर्थ होता है लेकिन नितिन तो जैसे अपने पिता की इस डांट को उल्टा ही लेने लगा.

अब नितिन के पिता ने उसे अनुशासन में लाने का फैसला कर लिया था. वे नितिन को हर कई बार टोकते कि अपने जूते सही जगह रखा करो, लाइट्स इस्तेमाल ना करने पर बंद किया करो, सुबह उठने के बाद बिस्तर खुद बनाया करो, कूड़ा कूड़ेदान में खुद डाला करो आदि.

धीरे धीरे नितिन को भी आदत पड़ गयी और वो काफी हद तक अनुशासन में रहने लगा लेकिन मन ही मन वह अपने पिता की इस टोकने की आदत को सेह नहीं पा रहा था. उसे लगता था कि उसके पिता जान बूझ कर उससे ये सब करवाते है और वो उनसे नफरत करने लगा.

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कुछ समय बाद नितिन आगे की पढाई करने के लिए विदेश चला गया और विदेश में वह पिता की डांट फटकार के बिना काफी खुश रहने लगा था. नितिन ने अपनी पढाई ख़त्म की और विदेश में ही नौकरी ढूंढने लगा लेकिन उसे कही नौकरी नहीं मिली. नितिन ने बहुत कोशिश की लेकिन कही कोई अच्छी नौकरी नहीं मिल पायी और फिर आखिरकार थक कर उसने घर वापिस जाने की सोची.

लेकिन 2 दिन बाद ही नितिन को एक फैक्ट्री में जॉब का offer आया. हालांकि नितिन काफी मायूस हो चूका था लेकिन फिर भी उसने फैक्ट्री में इंटरव्यू देने का फैसला किया.

जब नितिन फैक्ट्री में इंटरव्यू देने गया तो वहां बैठे एक व्यक्ति ने नितिन को इंतज़ार करने को कहा क्यूंकि फैक्ट्री के मालिक किसी काम से बाहर गए थे. नितिन ने बैठने की बजाये फैक्ट्री में लगी मशीने देखना शुरू कर दी और सोचने लगा कि अगर यहाँ नौकरी मिल जाए तो बहुत अच्छा होगा।

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नितिन ने देखा कि फैक्ट्री के एक कमरे में कई lights बिना वजह ही जली हुई थी, उसने सबसे पहले वो सारी लाइट्स बंद कर दी. फिर देखा कि एक नल खुला पड़ा था और उसमे से पानी बह रहा था, नितिन ने नल भी बंद किया। दूसरे कमरे में गया तो देखा कि कागज़ के कई टुकड़े ज़मीन पर गिरे हुए थे, नितिन ने वो सारे कागज़ के टुकड़े डस्टबिन में डाल दिए.

फैक्ट्री का मालिक ये सब एक CCTV कैमरा से देख रहा था.

फैक्ट्री के मालिक ने जब नितिन को ये सब करते देखा तो उसे अपने पास बुलाया और कहा “इस नौकरी के लिए 20 और लोगों का आवेदन आया था लेकिन मैंने तुम्हे सेलेक्ट कर लिया है क्यूंकि जब मैंने तुम्हे मेरी फैक्ट्री की लाइट्स बंद करते देखा, नल बंद करते देखा और कूड़े को डस्टबिन में डालते देखा तो मैं समझ गया था कि तुम बहुत अनुशासित लड़के हो. तुमने मेरी फैक्ट्री में बिना किसी वजह ही काम किया और ऐसा बहुत कम देखने को मलता है, तुम्हारी नौकरी पक्की, तुम कल से फैक्ट्री आ जाओ”

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ये सुन कर नितिन को अपने पिता की याद आ गयी और उसे समझ आ गया कि पिता जी जब मुझे इन सब चीज़ो के लिए टोकते थे तो वे सिर्फ मुझमे अनुशासन की प्रवित्ति लाने के लिए ऐसा करते थे. उसे एहसास हो गया था कि पिता की सिखाई आदतों की वजह से उसे ये नौकरी मिली है.

pita ka gussa

नितिन ने अगले ही पल अपने पिता को फ़ोन किया और उन्हें अपनी नौकरी की खुशखबरी दी और साथ ही उनसे माफ़ी भी मांगी.

दोस्तों, हमारे माता पिता अगर कभी हमें डांटते है तो वो सिर्फ इसलिए ताकि हम एक अच्छे इंसान बन सके और ज़िन्दगी में सफल हो सके.

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नमस्ते। मुझे नयी कहानियां लिखना और सुनना अच्छा लगता है. मैं भीड़-भाड़ से दूर एक शांत शहर धर्मशाला (H.P) में रहता हूँ जहाँ मुझे हर रोज़ नयी कहानियां देखने को मिलती है. बस उन्ही कहानियों को मैं आपके समक्ष रख देता हूँ. आप भी इस वेबसाइट से जुड़ कर अपनी कहानी पब्लिश कर सकते है. Like us on Facebook.

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