कोरोना के कहर में “घर कि यात्रा”

short hindi story / दुनिया में हर तरह के लोग है, यह सिर्फ सुना था लेकिन इन दिनों देख भी लिया। जी हा मै अपनी बात कर रहा हूँ मै दो दिन पहले दिल्ली से मोटर साइकिल से चला रास्ते मे हम थक कर कहीं रूक जाते थे। वहां के लोग पूछते कहाँ से आ रहे हो भाई हम बोलते दिल्ली से, तब वे हमे ऐसे देखते थे कि पता नहीं हमने कितना बड़ा जुर्म किया हो या साथ मे कोई बीमारी लेकर आ रहे है और वही कुछ लोग खाना पानी लेकर आते थे।

सब बोलते है कि पुलिस वाले ऐसे है वैसे है। पर यह दो दिन के सफर मे हमने उनको थोड़ा नजदीक से देखा। रास्ते में जहाँ भी पुलिस मिली हमारे साथ अच्छा व्यवहार ही किया। उन्होंने खाना भी खिलाया और मेडिकल भी कराया। हमे घर आने का रास्ता भी बताते रहे और यूपी पुलिस कुछ ज्यादा ही अच्छी थी जितना बोला जाये कम है।

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उन के लिए चलते चलते फिर कहीं रूक जाते तो वहां के लोग ज्ञान देने लगते थे कि वही रहना था घर क्यो जा रहे हो। यहा मत बैठो दूर से बात करो और पता नहीं क्या-क्या बोल रहे थे। इन दो दिनों मे हमारे ऊपर जो कुछ बीता उस को हम चार लाइनो मे ब्यान नही कर सकते।

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हम लोगों तो फिर भी ठीक थे क्योंकि हमारे पास बाइक थी। मै तो उनको देखकर हैरान था जो पैदल आ रहे थे। इस दौड़ मे तो वो भी सामिल जिनकी यह सब कि उम्र नहीं थी। वो छोटे छोटे बच्चे, वह वुजूर्ग लोग अभी भी याद आता है तो एक दम से शांत हो जाता हूँ कुछ कह नहीं पाता उनके बारे मे।

मैं रास्ते भर मे एक चीज देखा कोई भी राजनीतिक पार्टी का नेता नहीं दिखा। मुझे वो व्यापारी दिखे जिनके दुकानें बन्द परी है फिर भी वो बिस्कुट पानी खाना बाट रहे है। क्या उनको करोना का डर नहीं है या उनके परिवार नहीं है। घर आने के बाद हद तो तब हो गई मेडिकल कराने के कुछ लोग बात करने से डर रहे हैं। नजर नहीं मिला रहे है कि बात करना पड़ेगा। कुछ ऐसे भी है जो फोन कर के मना कर दे रहे है घर मत आना मै आज निशब्द हु हम उस गलती कि सजा भुगत रहे है जो हमने किया हि नहीं।

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3 Responses

  1. Ravi kumar says:

    Waah bhai kya likhte ho

  2. बहुत ही सीखने योग्य यात्रा रही है… आपकी इस यात्रा मे आपने इंसान के हर व्यवहार को देखा… अच्छा, बुरा आपकी ये यात्रा आपको इंसान के हर चेहरे से रूबरु करवाया!! ये यात्रा इंसान की सोच समझ की सीमाओं को दर्शाया है और आपने इस यात्रा से जो सिखा समझा जाना बुझा हमलोग के साथ साझा किया – धन्यवाद आशुतोष जी

  3. Rakesh Gupta says:

    Ohhh. Nice Hindi Story.

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