दोहरा कानून (Short Moral Story in Hindi)

Dohra Kanoon Story in Hindi

हवलदार सुखीराम रात के दो बजे एक कॉलोनी मे गश्त लगा रहा था। काफी देर से
थका होने के कारण अपने भारी भरकर शरीर को एक दीवार से लगाकर डंडे को दोनो
हाथो मे कसकर सुस्ता रहा था।
कि तभी,एक आहट ने उसकी नींद उडा दी।

एक बिगडैल युवक ने लघुशंका कर रहे बूढे आदमी को बाईक से टक्कर मार दी थी
और खुद भी गिर गया था।

सुखीराम टोपी संभालकर हाथ मे डंडा कसकर रौब से चलते हुए युवक के पास गया
और एकाएक बुरा सा मुंह बनाकर युवक को घूरने लगा।
युवक के मुंह से शराब की बू आ रही थी।

सुखीराम ने लपककर युवक की गिरेबान पकडी और बोला-क्यो बे छोकरे,आधी रात को
शराब पीकर आवारगर्दी करने वाले को क्या ईनाम मिलता है पता है?चल हवालात
मे वहां तेरा नशा उतार देता हूं। बेचारे बूढे को टक्कर मार दी, चल मेरे साथ
हवालात मे वहां तूझे जूतो का हलवा खिलाता हूं।

ऐसा कहकर सुखीराम ने युवक को खींचकर ले जाना चाहा, पर तभी युवक ने
सुखीराम का हाथ छुडाकर झटका और आग्नेय नेत्रो से घूरते हुए बोला-जानता है
हवलदार, मै किसका बेटा हूं? एसीपी श्याम सिन्हा का नाम सुना है?

सुखीराम का हलक सूख गया-श्याम सिन्हा साहब के बेटे है आप !! माफ करना
साहब मैने पहचाना नही।

मैने आपके साथ कोई बदसलूकी की हो तो माफ करना और साहब से मत कहना।

युवक वहां से चला गया और वो बूढा जिसने बाईक से टक्कर खाई थी, मन ही मन
सोचने लगा-इसका मतलब कानून का पालन सिर्फ आम आदमी को करना पडता
है। अफसरजादो पर कानून लागू नही होता। ठीक है भाई जब कानून के रखवाले ही
हमे टक्कर मारे तो शिकायत किससे जाकर करे।

ऐसा सोचते हुए बूढा लाठी टेकते हुए अपने घर मे घुस गया।
उसे इस कानून के इस दोहरे रवैये पर गुस्सा भी आ रहा था और हँसी भी आ रही थी।

स्वरचित

वेलाराम देवासी

निवास -भटाणा,राजस्थान.

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