बचपन का प्यार – एक प्रेम कहानी ( भाग -५ ) Interesting Romantic Story in Hindi

( सूचना – दोस्तो, अगर अपने भाग – १,२,३ और ४ नही पढ़ा है, तो इस link के जरिए पढ़ सकते हो। या फिर इस ब्लॉग पे देख सकते हो पहले का भाग )

Interesting Romantic Story in Hindi

वह व्यक्ति ओर कोई नहीं, परेश के पापा थे। इतनी देर तक परेश को घर न पाकर, वह चिंतित होकर सुनीता के घर गए थे। वहा से उनको पता चला था की, सुनीता अस्पताल में है। तब उनको यह भी प्रतीत हुआ था, की शायद परेश वहा हो सकता है। बस, इसी चिंता में विवश होके वो अस्पताल में आए। उनको देखकर परेश बहुत ही घबरा गया, उसको बहुत डर लग रहा था; क्यों की वह बिना बताए घर से निकला था और उनको सूचित भी नहीं किया था।

Best Romantic Love Story in Hindi

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परेश के पिता ने, गुस्से में आग बबूले होकर सुनीता के मम्मी-पापा को कहा, “ देखो परेश तो अभी बच्चा है, नादान है, नसमज है; लेकिन आप तो समझदार हो ना! क्यों मेरे बेटे को मौत के मुंह में डाल रहे थे? उसको अगर कुछ हो जाता तो! डॉक्टर साहब ने सब बता दिया है मुझे, की परेश ने अपना काफी खून देकर सुनीता की जान बचाई है। आप सबने एक बार भी मुझे बताना सही नही समझा। मेरे बेटे की जिंदगी का फैसला करनेवाले, आप होते कौन है? क्या अपनी बेटी की जान की खातिर आप इतने स्वार्थी हो गए थे, की आपने मेरे बेटे की जान खतरे में डाल दी ? जवाब दो मुझे। चुप-चाप क्यों खड़े हो?”

परेश ने अपने पिता को शांत करते हुए कहा, “ पिताजी, आप शांत हो जाईए। मैं इसका उत्तर देता हूं। सुनीता को खून मैंने अपनी इच्छा से दिया है, इसमें सुनीता के मम्मी-पापा की कोई गलती नहीं है। उनको तो इस सच्चाई के बारे में तब पता चला, जब डॉक्टर ने ऑपरेशन के बाद ये सच्चाई बताई, तब तक वह अनजान थे। इसमें उनकी कोई गलती नहीं, अगर उनको पहले से ही पता होता, तो मुझे वो खून नहीं देने देते। आप चाहे तो डॉक्टर से पूछ सकते हो और मैंने एक कागज पे इसी बात का हस्ताक्षर भी किया था, वह भी देख सकते हो। ” बेटा, तुम्हें ये सब करने की क्या जरूरत थी? कही तुझे कुछ हो जाता तो! लेकिन मुझे खुशी है, की तुम सही सलामत हो। बेटा मुझे तुम पर गर्व है। तुमने अपने प्यार के लिए अपनी जान तक खतरे में डाल दी, तुम धन्य हो! तुम्हारा सुनीता के प्रति प्यार धन्य है!” परेश के पापा ने कहा।

best love story in hindi

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अगले २-५ दिनों में सुनीता की अस्पताल से रिहाई हो गई, लेकिन परेश को अभी भी ५ दिन ओर अस्पताल में रुकना था, इलाज के लिए। अस्पताल में परेश की देखभाल के लिए सुनीता पूरा दिन उसके साथ रहती और उसका ध्यान रखती। सुनीता, परेश के लिए, अपने घर पे जाकर अपने हाथो से खाना बनाती और अस्पताल में आके अपने हाथों से उसको खाना खिलाती। दोनों अस्पताल में बैठकर घंटो तक प्यारभरी बाते करते। सुनीता को बस उसी पल का इंतजार था, की कब परेश को अस्पताल से रिहा मिले ? ताकि वह अपने घर जा सके। धीरे-धीरे ये ५ दिन भी पूरे हो गए और परेश को अस्पताल से रिहा मिल गई।

Romantic couple story in Hindi

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दोनों ने कुछ दिनों घर पर पर आराम किया। फिर कुछ दिनों बाद, दोनों अभ्यास के लिए, नियमित विद्यालय जाने लगे और दोनों ने एक-दूसरे से वादा किया की, दोनों एक-दुसरे का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। फिर परेश लेखक बनने के लिए अभ्यास करने लगा और सुनीता चित्रकार बनने के लिए। दोनों अपने अभ्यास में भी ध्यान देते और रोज प्यारभरे पल भी बिताते।

( सूचना – यह कहानी काल्पनिक है। इस कहानी में दिए गए, सारे पात्र और जगह भी काल्पनिक है। किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा उद्देश नहीं है। यह कहानी तो काल्पनिक है, लेकिन उसमे दिए गए कुछ भाव और अनुभूति मेरे व्यक्तिगत अनुभव से है।)

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1 Response

  1. Arun Nair says:

    “Loved the Story. Very beautiful”👍 Keep it up

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