जानिये कैसे की मैंने आर्मी भर्ती की तैयारी – एक फौजी की ज़बानी

इस कहानी के लेखक किशोर नाइक अब फ़ौज में कार्यव्रत है.

इंडियन आर्मी का एक स्लोगन है – हम तुम्हे पहले तोड़ेंगे और फिर जोड़ेंगे।

 

ये स्लोगन मैं हमेशा याद रखता हू क्यूंकि मुझे पता है कि  इंडियन आर्मी में भर्ती के लिए बहुत मेहनत लगती है. इंडियन आर्मी सिर्फ उन्ही को भर्ती करती है जो सबसे फिट और तेज़ है ताकि युद्ध के वक़्त हर फौजी हिम्मत और साहस से दुश्मन का मुकाबला कर सके.

 

जब मैं भर्ती की तयारी कर रहा था तो मेरा लक्ष्य सिर्फ एक था – 1600 मीटर की वो रेस पूरी करना क्यूंकि वो सबसे मुश्किल रेस होती है और मेरी कोशिश थी कि ज़्यादा से ज़्यादा स्टैमिना बना पाउ ताकि इस रेस को आसानी से पार कर लू.

मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे बहुत अनुभवी कोच मिले. उन्होंने मुझे बताया कि तुम्हे 1600 मीटर की इस रेस को पूरा करने में सिर्फ 5 मिनट और 45 सेकंड मिलेंगे. अगर एक भी सेकंड कोई लेट हो जाता है तो भर्ती नहीं होती. इस रेस को 2 ग्रुप में बांटा होता है. जो व्यक्ति 5 मिनट और 30 से 45 सेकंड में रेस पूरी करता है उसे ग्रुप 2 में रखते है और जो 5 मिनट 30 सेकंड के अंदर रेस पूरी करता है उसे ग्रुप 1 में रखा जाता है. मेरा लक्ष्य था ग्रुप 1 में आने का.

 

मेरे कोच ने मुझे कहा था कि 1600 मीटर की इस रेस को पूरा करने के लिए सिर्फ स्टैमिना ही नहीं बल्कि शरीर में बहुत फुर्ती और जान भी चाहिए. आर्मी में मेरी भर्ती निश्चित करने के लिए मेरी रूटीन बनायीं जो इस प्रकार है:

 

पहला दिन: 1600 मीटर की दौड़ जो कि मुझे कम से कम टाइम में पूरी करनी होती थी.

 

दूसरा दिन: 100 मीटर का स्प्रिंट. मेरे कोच ने मुझे कहा था कि 100 मीटर का स्प्रिंट दिन में चार बार करना है. पहले 100 मीटर का स्प्रिंट फिर 2 मिनट पैदल। इसी तरह 4 बार करना होता था. इससे स्टैमिना तो बढ़ता ही है साथ में फेफड़ो और दिल की ताकत भी बढ़ती है.

 

तीसरा दिन: तीसरे दिन मुझे कड़ी शारीरक व्यायाम करना होता था जैसे कि दंड, उठक बैठक, लटकना, आदि. ये व्यायाम कोई मामूली नहीं बल्कि शरीर की पूरी ताकत निचोड़ने वाला होता था. व्याययाम को करने का मकसद शरीर में फुर्ती और ताकत था. अगर शरीर में ताकत और फुर्ती होगी तो ही कोई 1600 मीटर की रेस कम से कम समय में कर सकता है.

 

चौथा दिन: 1600 मीटर की दौड़ कम से कम समय में पूरी करना.

 

पांचवा दिन: शारीरक व्यायाम

 

छठा दिन: रेस्ट

 

सांतवा दिन: रिपीट

 

मेरे कोच ने मुझे बताया कि रेस्ट बहुत ज़रूरी है क्यूंकि इससे शरीर की मांसपेशियों को रिपेयर होने का समय मिल जाता है जिससे इंजरी बहुत कम होती है. अगर आप आर्मी भर्ती क्लियर करना चाहते है तो ये schedule ज़रूर अपनाये. 1600 मीटर की दौड़ के साथ साथ अपना शारीरक विकास पर भी ख़ास ध्यान दे.

 

मैंने 1600 मीटर की ये दौड़ 5 मिनट और 20 सेकंड में पूरी कर ली थी क्यूंकि मुझे काफी कुछ पहले से पता था और अब आपको भी पता है कि तैयारी कैसे करनी है. अगर आप ये रूटीन बना लेंगे तो यकीनन आर्मी में भर्ती हो जायेगी.

जय हिन्द

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1 Response

  1. ankit mandanka says:

    jay hind

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