मदर टेरेसा बायोग्राफी हिंदी – Mother Teresa Life Story in Hindi

नाम:- अग्नेसे गोंकसे बोजसेऊ (Agnes Gonxha Bojaxhiu)

पिता का नाम:- निकोल बोयाजू

माता का नाम:- द्रणा बयाजू

जन्मतिथि:-  26 अगस्त 1910

जन्मस्थान:- सोपजे, मेसेडोनिया (Skopje, Macedonia)

मृत्यु तिथि :- 5 सितंबर 1997 (87 years)

मृत्यु स्थान :- कोलकाता

Mother Teresa Information in Hindi in Short

Mother Teresa Life Story in Hindi

प्रारंभिक जीवन

मदर टेरेसा का जन्म एक मध्य वर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता एक साधरण व्यवसायी थे। मदर टेरेसा अपने 5 भाई बहनों में सबसे छोटी थी। उनके नाम का अर्थ एक खूबसूरत कली था और वो अपने नाम की तरह ही बहुत खूबसूरत भी थी। उन्हें लोगों की सेवा करने का शौक बचपन से ही था। उनके पिता का देहांत तब हुआ जब वो महज 8 साल की थी। उनको गाने का भी शौक था। उन्होंने अपने बचपन को काफी कठिनाइयों के साथ काटा।

नाम परिवर्तन

उन्होंने महज 12 साल की उम्र में ही ये जान लिया था कि वो लोगो की सेवा के लिए बनी है। इन्होंने महज 18 साल की उम्र में ‘सिस्टर्स ऑफ लोरेटो’ (Sisters of Loreto) नामक संस्था से जुड़ कर लोगो की सेवा का जिम्मा उठाया और आयरलैंड आ गयी। 1981 में उन्होंने अपना नाम परिवर्तित कराकर टेरेसा कर लिया और लोग उनको सिस्टर टेरेसा बुलाने लगे।

फ्री नन बनने के बाद की कठिनाइयां

जब उन्होंने देखा कि उनके आसापास के लोगो मे कितनी सारी कठिनाइयां है और लोग कितने कष्ट में है तो उन्होंने उनकी सेवा मुफ्त में करने की सोची। उन्होंने अलग अलग देशो में जा कर वही की संस्था से जुड़कर काम किया और लोगो की सेवा की। उन्होंने भारत की नागरिकता लेकर लोगों की सेवा करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने पटना में रहकर अस्पताल में काम किया और लोगो की सेवा की। उन्होंने शुरुआत के दिनों में इतने कष्ट देखे की एक पल के लिए उनको लगा कि ये सब छोड कर वापस अपनी आरामदायक जीवन मे लौट जाओ। लेकिन जब उन्होंने लोगो की तकलीफ दिखी तो उनको ये खयाल दुबारा नही आया। उनका ये मानना था कि ‘प्यार की भूख  रोटी की भूख से बहुत बड़ी होती है’। उनका उद्देश्य बस लोगो की निस्वार्थ भाव से सेवा करना था। उन्होंने कभी भी जात पात में भेद भाव नही किया। उनके मन मे लोगो के लिए अपार प्रेम भरा हुआ था। उनसे किसी की भी तकलीफ देखी नही जाती थी।

कोलकाता की संत

उनको कोलकाता की संत कहा जाता है। उन्होंने कोलकाता में रहकर बहुत सारे जरूरतमंद लोगों की सेवा की है। उन्होंने जरूरतमंदों के लिए आवास और खाने का बंदोबस्त भी किया। उन्होंने बेसहारा अनाथ बच्चों के लिए रहने और खाने के लिए शांति निवास, निर्मल बाल निवास का निर्माण भी कराया। इस कार्य को करने में भारत सरकार और कोलकाता सरकार ने उनका पूरा पूरा सहयोग किया।

पुरस्कार व सम्मान:-

1931:- पोपजन 23वे का शांति पुरस्कार

1962:- भारत सरकार द्वारा पद्मश्री

1988:- आईर ऑफ थे ब्रिटिश इम्पायर

1979:- नोबेल पुरस्कार

जीवन के अंतिम पल

जैसे जैसे समय बीतता गया और उम्र बढ़ती गयी उनका स्वस्थ भी गिरता गया । 73 वर्ष की आयु में उनको पहला हृदयघात आया। जिसके बाद उन्हें 1989 में पेसमेकर लगाया गया । उस वक्त वे रोम में पॉप जॉन पॉल द्वितीय से मिलने गयी हुई थी। 1991 में उन्हें निमोनिया हो गया जिसके बाद उनकी तबियत बिगड़ने लगी। 13 मार्च 1997 में उन्होंने ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ का मुख्य पद से त्याग दे दिया। 5 सिंतबर1997 को उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उस समय तक ‘ मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ में कुल 4000 सिस्टर और 300 कुल सहयोगी जुड़ चुके थे। ये सभी लोग कुल 123 देशो की सेवा में कार्यरत थे।

विवाद

मदर टेरेसा पर धर्म परिवर्तन का आरोप भी लगे। उन पर आरोप लगा था की वे भारतीय लोगो को फ्री सेवा कर धर्मपरिवर्तन के लिए आकर्षित करती हैं। वे ईसाई धर्म की अनुयायी थी।

संत की उपाधि

जीवन भर लोगो की सेवा करने वाली मदर टेरेसा को वेटिकन के सेंट पीटर्स स्क्वेयर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में लगभग एक लाख लोगों की मौजूदगी में पोप फ्रांसिस ने मदर टेरेसा को संत की उपाधि से नवाजा। यह उपाधि उन्हें मृत्यु की 19 साल बाद मिला था।

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