मिल्खा सिंह जीवनी – Milkha Singh Life Story in Hindi

नाम :- मिल्खा सिंह

उप नाम :- फ्लाइंग सिख (Flying Sikh)

जन्म-तिथि :- 20 नवंबर 1929

जन्मस्थान :– गोविन्दपुरा, पंजाब

पत्नी का नाम :- निर्मल कौर

बच्चे :- तीन बेटियां, एक बेटा

खेल श्रेणी :- ट्रैक एवं फील्ड धावक

प्रारंभिक जीवन और कैरियर की शुरुआत

मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर 1929 को गोविन्दपुरा, पंजाब, ब्रिटिश इंडिया (वर्तमान पंजाब,पाकिस्तान)  में हुआ था | 1947 में भारत-पाक विभाजन के समय इन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया, तब इनकी उम्र मात्र 12 वर्ष थी | वह अपनी जान बचाने के लिए शरणार्थी बन कर ट्रेन में पाकिस्तान से दिल्ली आ गए जहाँ इनकी शादी-शुदा बहन रहती थी । मिल्खा सिंह के कुल 14 भाई-बहन थे, उनमें से कई अल्पआयु में ही गुजर गए। मिल्खा सिंह को बचपन से ही पढ़ाई से ज़्यादा खेल कूद ज्यादा पसंद था। अपने बड़े भाई हवलदार माखन सिंह के कहने पर मिल्खा ने भारतीय सेना में भर्ती होने का निर्णय लिया। सन 1951 में मिल्खा, चौथी कोशिश के बाद सेना में विद्दुत मैकेनिकल इंजीनियरिंग शाखा मे भर्ती हो गए। सेना में उन्होंने अपने अंदर के तेज़ धावक को पहचाना। सेना में आयोजित होने वाले खेल में उन्होंने भाग लिया। अपनी कड़ी मेहनत से मिल्खा सिंह 400 मीटर के दूरी को 1 मिनट 30 सेकंड के अंदर पूरा कर लेते थे।

अंतरराष्ट्रीय कैरियर

सन 1956 में पटियाला में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में मिल्खा सिंह ने एक नया कीर्तिमान रचा। इस दौरान उन्हें 1956 मेलबोर्न ओलंपिक में मौका मिला, कम अनुभव के वजह से वह विश्व रिकॉर्ड से काफी पीछे रह गए थे। लेकिन मिल्खा ने हार नहीं मानी, सन 1958 कटक में एशियाई एथलेटिक्स प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसमे 200 मीटर और 400 मीटर के दौड़ में स्वर्ण पदक जीत के मिल्खा सिंह ने एक नया कीर्तिमान बनाया। उसी साल कामनवेल्थ खेलो में, उन्होंने 400 मीटर रेस 46.6 सेकंड में पूरी करते हुए स्वर्ण पदक जीता और ऐसा करने वाले पहले भारतीय बन गए। 1960 के रोम ओलंपिक में मिल्खा सिंह से भारतीयों को काफी उम्मीदें थी। लेकिन अपनी पूरी कोशिश के बाद भी वह 400 मीटर की फाइनल दौड़ में कांस्य पदक जीतने से (0.1 सेकंड) पीछे रह गए । 1964 के टोक्यो ओलंपिक में भी उन्होंने ने भारत की प्रतिनिधित्व की। मिल्खा सिंह को 1962 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने “The Flying Sikh” का नाम दिया। मिल्खा सिंह हमारे देश के गौरव हैं।

इसके आलावा देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने भी मिल्खा सिंह की असाधारण खेल प्रतिभा की प्रशंसा की थी। मिल्खा सिंह ने अपनी अद्वितीय स्पीड के कारण कई रिकॉर्ड दर्ज किए हैं। मिल्खा सिंह ने अपनी बेटी सोनिया संवलका के साथ मिलकर अपनी बायोग्राफी ‘The Race Of My Life’ लिखी थी। मिल्खा सिंह के इस किताब से प्रभावित होकर बॉलीवुड के निर्देशक राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने उनके प्रेरणादायी जीवन पर एक फिल्म बनाई थी, जिसका नाम ‘भाग मिल्खा भाग’ था। इस फिल्म फरहान खान ने मिल्खा सिंह का किरदार निभाया हैं।

मिल्खा सिंह बायोग्राफी

निजी जिंदगी

मिल्खा सिंह ने भारतीय महिला वालीबाल टीम की पूर्व कप्तान निर्मल कौर से सन 1962 में शादी की। उनके 3 बेटियां और एक बेटा है। उनका बेटा जीव मिल्खा सिंह अंतर्राष्ट्रीय गोल्फ प्लेयर है। 1999 साल में मिल्खा सिंह और निर्मल कौर ने बैटल ऑफ़ टाइगर हिल में मारे जाने वाले हवलदार विक्रम सिंह के सात साल के बेटे को गोद लिया था।

सम्मान और कीर्तिमान

साल 1958 :- एशियाई खेलों की 200 मीटर रेस में स्वर्ण पदक

साल 1958 :- एशियाई खेलों की 400 मीटर रेस में स्वर्ण पदक

साल 1958 :- कामनवेल्थ खेलों की 440 गज रेस में स्वर्ण पदक

साल 1959 :- पद्मश्री पुरस्कार

साल 1962 :- एशियाई खेलों की 400 मीटर रेस में स्वर्ण पदक

साल 1962 :- एशियाई खेलों की 4*400 रिले रेस में स्वर्ण पदक

साल 1964 :- कलकत्ता राष्ट्रीय खेलों की 400 मीटर रेस में रजत पदक

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