आर्मी की बहादुरी पर कहानियां – Indian Army Bravery Stories in Hindi

हम आपको दो Indian Army bravery stories in Hindi के बारे में बताने जा रहे है. ये Inspirational Army stories in Hindi हर एक नौजवान को ही नहीं बल्कि हर भारतीय को पढ़नी चाहिए ताकि हर एक को आर्मी की बहादुरी की सीमा का एहसास हो सके. तो आईये, हम आपको पहली फौजी की कहानी सुनाने जा रहे है सूबेदार योगेंद्र सिंह की.

Indian Army Bravery Stories in Hindi

आपने ऋतिक रोशन की ” लक्ष्य ” फिल्म तो देखि होगी. उसमे पूरी सच्चाई नहीं थी, पूरी सच्चाई आज हम आपको इस आर्मी स्टोरी के ज़रिये सुनाने जा रहे है. 4 जुलाई 1999 का दिन था जब ” घातक ” नाम की पल्टन को कारगिल में टाइगर हिल पर कब्ज़ा करने के लिए भेजा गया. योगेंद्र सिंह उस पल्टन में सूबेदार थे. टाइगर हिल एक पहाड़ी थी जो सीधा खड़ी थी और जिसकी लम्बाई लगभग 16,500 फ़ीट थी. सबसे बड़ी दिक्कत ये थी कि किसी ना किसी को पहाड़ी पर चढ़ कर रस्सियां बांधनी थी ताकि सभी फौजी पहाड़ पर चढ़ सके. दुश्मन के बंकर पहाड़ के ऊपर थे और उन तक पहुँचने के लिए पहाड़ को चढ़ना ज़रूरी था.

Indian Army Bravery Stories in Hindi

उस वक्त सूबेदार योगेंद्र सिंह आगे आये और पहाड़ पर चढ़कर रस्सियां लगाने का काम शुरू किया लेकिन पहाड़ी पर बैठे दुश्मन ने उन्हें देख लिया और ऊपर से गोलियां चलनी शुरू कर दी. उस हमले में पल्टन के कमांडर और 2 सैनिक शहीद हो गए. उस हमले में सुब्दार योगेंद्र सिंह को कंधे और पैर में कई गोलियां लगी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और रस्सियां बांधते रहे. उन्होंने काफी देर तक घायल हालत में इंतज़ार किया, उस वक़्त वे पहाड़ी पर ही लटके हुए थे. कुछ देर बाद दुश्मन को लगा कि सभी हिंदुस्तानी सैनिक मर चुके है, लेकिन ऐसा नहीं था. 15 घंटे इंतज़ार करने के बाद घायल योगेंद्र सिंह फिर से पहाड़ी पर चढ़े और अपनी पल्टन के बाकी बचे सैनिको को इशारा किया कि अब वो भी छुपते हुए पहाड़ी चढ़कर ऊपर आ जाए.

Indian Army Bravery Stories in Hindi

बस फिर क्या था, सूबेदार योगेंद्र सिंह ने पहाड़ी के ऊपर चढ़ते ही एक ग्रेनेड दुश्मन के बंकर में फेंक दिया जिससे उस बंकर में बैठे सभी दुश्मन सिपाही मारे गए. तभी वहा बैठे बाकी दुश्मन सैनिको में हड़कंप सा मच गया लेकिन घायल योगेंद्र सिंह आगे बढ़ते रहे और दुश्मन की गोलियों से बचते रहे. इतनी देर में नीचे से बाकी हिंदुस्तानी सैनिक भी ऊपर आ गए और उन्होंने बड़ी बहादुरी से दुश्मनो का सामना किया और उन्हें टाइगर हिल से भगा दिया. इस तरह सूबेदार योगेंद्र सिंह ने अपनी पलटन का साथ दिया और टाइगर हिल पर कब्ज़ा करने में सहयोग दिया.

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इतनी गोलियां लगने के बाद योगेंद्र सिंह को मिलिट्री हॉस्पिटल ले जाय गया जहाँ डॉक्टर ने बोल दिया था कि इनके बचने की उम्मीद बहुत कम है लेकिन योगेंद्र सिंह ने मौत को भी चकमा दे दिया और कुछ दिनों में बिलकुल स्वस्थ हो गए. सूबेदार योगेंद्र सिंह पहले ऐसे आर्मी के सैनिक है जिन्हे जीते जी परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया. हालांकि परम वीर चक्र सिर्फ शहीद फौजियों को ही मिलता है उनकी बहादुरी और बलिदान के लिए. ऐसे फौजी को हमारा सलाम है.

2nd Army Kahani – Indian Army Bravery Stories in Hindi

 

सुबह का वक़्त था. आर्मी को खबर मिली थी कि जम्मू के एक छोटे से गाँव में कुछ आतंकवादी छुपे हुए है. इंडियन आर्मी तुरंत उस गाँव के लिए निकल गए लेकिन किसी ने उन आतंकियों को पहले ही खबर दे दी थी कि इंडियन आर्मी को उनका पता चल गया है. जब आतंकी उस गाँव से भागने की कोशिश कर रहे थे तो इंडियन आर्मी के जवानो ने उन्हें घेर लिया और कई आतंकियों को मार गिराया लकिन किसी तरह उन आतंकियों का कमांडर बच गया. वो गाँव के एक घर में घुस गया. उस घर में एक छोटा बच्चा था. उस आतंकी ने उस बच्चे के सिर पर बन्दूक रख कर आर्मी के जवानो को चेतावनी दी कि उसका रास्ता छोड़ दे वर्ना वह बच्चे को मार देगा.

Indian Army Bravery Stories in Hindi

आर्मी वाले बच्चे की सुरक्षा किसी भी कीमत पर चाहते थे. आर्मी के एक अफसर ने उस आतंकी को कहा कि वो यहाँ से चला जाए लेकिन बच्चे को छोड़ दे लेकिन वो आतंकी नहीं माना और बन्दूक उस बच्चे के सिर पर रखे बैठा रहा. इसी बीच आर्मी ने बड़े चुपके से एक स्नाइपर (SNIPER) को बुला लिया था और उसे आदेश दिया था कि सिर्फ सही वक़्त पर गोली चलाये क्यूंकि बच्चे की जान सबसे कीमती है.

Indian Army Bravery Stories in Hindi

स्नाइपर उस आतंकी से 400 से 500 मीटर की दूरी पर एक घने पहाड़ पर मुजूद थे. वो स्नाइपर 12 घंटे से भी ज़्यादा अपनी बन्दूक उस आतंकी पर टिकाये लेता रहा और उस आतंकी को स्नाइपर की मज़ूदगी का ज़रा सा भी एहसास ना हुआ. 12 घंटे के लम्बे इंतज़ार के बाद जब उस आतंकी ने अपना शरीर ज़रा सा उस बच्चे से दूर किया तभी स्नाइपर ने गोली मार कर उसे इस दुनिया से रुखसत कर दिया. इतना सब्र और बिना कोई आहट किये घंटो तक दुश्मन पर आँख लगाए रखना सिर्फ आर्मी का जवान ही कर सकता है.

ऐसे वीर जवानो के साहस को हमारा नमन है. हमारी कामना है कि इस साल एक भी फौजी शहीद ना हो.

दोस्तों ये थी दो Indian Army Bravery Stories in Hindi. अगर आपको ये inspirational army stories in hindi आपके दिल को छू गयी तो कमेंट में ज़रूर बताये और शेयर करना ना भूले.

जय हिन्द

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