बेटी का जन्म दिन मना कर ड्यूटी पर आया था….. शहीद की कहानी

मनोज कुमार शहीद की कहानी – Indian army ki kahani

14 फरवरी जिस दिन वैलेंटाइन डे यानि कि प्यार का दिन होता है उसी दिन आतंकियों ने CRPF के एक काफिले पर हमला कर कई औरतो के प्यार को छीन लिया। इस हमले की वजह से पूरा देश रोया क्यूंकि इस हमले में 44 जवान, किसी का भाई, किसी का सुहाग और किसी का बेटा शहीद हुए है. इसमें कोई शक नहीं कि इन जवानो पर हुए हमले की वजह से पूरा देश दुखी है लेकिन जो दुःख इन जवानो के घरवालों को है, उसके सामने हमारा दुःख कुछ भी नहीं.

शहीद की कहानी

शहीद की कहानी

कोई भी आम आदमी ये समझ सकता है कि जब किसी के घर मातम छाता है तो सिर्फ आंसू नहीं दिल भी रोता है. इस हमले की खबर जैसे ही इनके घरवालों को मिली, उसकी पूरी ज़िन्दगी ही तहस नहस हो गयी. आज हम आपको पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद मनोज कुमार की कहानी बताने जा रहे है. मनोज कुमार ओडिशा के रतनपुर गाँव से था. वह सेना में कांस्टेबल के पद से था और जब उसके घरवालों को उसकी शहादत की खबर मिली तो उनकी जैसे पूरी दुनिया ही ख़त्म हो गयी थी.

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मनोज कुमार CRPF के 61 Batallion में कांस्टेबल के पद पर थे. उनकी पत्नी का नाम ईतिलता था और दोनों का विवाह साल 2017 में हुआ था. दोनों अपनी ज़िन्दगी में खुश थे और उनकी ये ख़ुशी दोगुनी हो गयी थी जब उन्हें एक बेटी हुई.

14 फरवरी को सुबह 3 बजे मनोज कुमार ने अपनी पत्नी को फ़ोन करके बताया था कि उनका काफिला श्रीनगर के लिए बस निकलने ही वाला है और ये खबर सुन उनकी पत्नी खुश भी थी. यही नहीं मनोज ने ये भी कहा था कि वहां पहुँचने के बाद दोबारा फ़ोन करूँगा लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. जब उनका काफिला श्रीनगर से निकला उसके कुछ ही देर बाद एक आतंकवादी ने अपनी कार में भारी मात्रा में विस्फोटक लिए एक ट्रक को टक्कर मार दी. जिस ट्रक को टक्कर मारी थी उसमे मनोज कुमार के साथ कई और जवान भी थे. इस हमले में 44 जवान शहीद हो गए और मनोज उनमे से एक था.

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उधर मनोज की पत्नी को जब इस हादसे का पता चला तो वो बेसुध सी हो गयी और एक पल के लिए तो हक्की बक्की रह गयी क्यूंकि उन्होंने अभी कुछ ही देर पहले तो अपने पति से बात की थी. मनोज की पत्नी के लिए इस बात पर विशवास करना बहुत मुश्किल था लेकिन यही सच्चाई थी.

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मनोज दिसंबर 2018 में छुट्टियों पर घर आया हुआ था और 16 जनवरी को ही उन्होंने अपनी बेटी का पहला जन्म दिन भी मनाया था. उस दिन वे लोग बहुत खुश थे लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनके घर का चिराग इतनी जल्दी उन्हें छोड़ किसी और दुनिया में चला जाएगा. मनोज 6 फरवरी को अपनी ड्यूटी के लिए निकला था और 14 फरवरी को ही ये हमला हो गया.      

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हम प्रार्थना करते है कि भगवान शहीद मनोज कुमार की आत्मा को अपने चरणों में जगह दे और उनके परिवार को इस सदमे से बचने की शक्ति दे.

जय हिन्द  

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